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सावन के तीसरे सोमवार पर भगवान ओंकारेश्वर को लगाया लड्डू-पेड़े का भोग निकली सवारी

 खंडवा, ओंकारेश्वर । सावन माह के तीसरे सोमवार को तीर्थनगरी में भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के महाश्रंगार के दर्शन और गोमुखघाट पर भगवान ममलेश्वर का पंचामृत अभिषेक श्रद्धालुओं में आकर्षण और श्रद्धा का केंद्र रहा।

साल भर में एक बार होने वाले भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के मूलस्वरूप के महाश्रंगार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु निहारते है। ज्योतिर्लिंग मंदिर को भी फूलों से सजाया गया है। शाम चार बजे मंदिरों से सवारी निकाली गई। भगवान ओंकारेश्वर और ममलेश्वर को नौका विहार करवाया गया।

सावन के अधिक मास में तीसरे सोमवार को सुबह साढ़े चार बजे से मंदिर में दर्शनों का सिलसिला शुरू हो गया था। दिन चढ़ने के साथ भीड़ बढ़ती गई। कतार में लग कर लोगों ने दर्शन-पूजन किया। भगवान को इस मौके पर 501 किलो लड्डू -पेड़े का भोग लगाया गया।

दोपहर में ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के मूल स्वरूप को फूल, फल,भांग और मेवों से महाश्रंगार कर उन्हे चांदी का मुकुट पहनाया गया। साल में एक बार होने वाले महाश्रंगार के श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। हर वर्ष यह सावन के दूसरे सोमवार को होता है लेकिन इस बार दूसरे सोमवार को सोमवती अमावस्या होने से महाश्रंगार तीसरे सोमवार को किया गया।

दोपहर में भगवान ओंकारेश्वर और ममलेश्वर महादेव की सवारी मंदिर के पंडित,पुजारी,ट्रस्ट कर्मचारी और श्रद्धालुओं की मौजूदगी में निकाली गई। सवारी मार्ग में फूल और गुलाल उड़ाकर लोगों ने भगवान के दर्शन किए।

मंदिर ट्रस्ट के सहायक कार्यपालन अधिकारी अशोक महाजन और सवारी प्रभारी आशीष दीक्षित ने बताया कि भगवान ओंकारेश्वर की सवारी ने शाम चार बजे मंदिर से कोटितीर्थ घाट के प्रस्थान किया। घाट पर भगवान के पंचमुखी रजत मुखौटे का वेदआचार्य पंडित राजराजेश्वर दीक्षित के आचार्यत्व मंदिर के पुजारी व पंडित अभिषेक किया गया।

इसी तरह गोमुख घाट पर भगवान ममलेश्वर की सवारी पहुंचने पर वहां भगवान के मुखौटे का पूजन व पंचामृत अभिषेक किया गया। परंपरानुसार भगवान ओंकारेश्वर की सवारी नर्मदा नदी में नौका विहार करती हुई गोमुख घाट पहुंची। यहां से भगवान ममलेश्वर के साथ जेपी चौक तक भ्रमण कर वहां से भगवान ओंकारेश्वर पुराने झूला पुल से होते हुए मंदिर पहुंचे। आरती में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

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