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मुरैना लोक निर्माण विभाग: लापरवाही की हदें पार, सड़कों के हाल बेहाल
मुरैना लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यशैली इन दिनों लगातार सवालों के घेरे में है। जिलेभर में सड़कों की जर्जर हालत और विकास कार्यों में हो रही भारी सुस्ती ने आम जनता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। विभाग के लचर रवैये के कारण करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी धरातल पर सुधार नजर नहीं आ रहा है। शहरी इलाकों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक की मुख्य सड़कें बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। आए दिन इन गड्ढों के कारण वाहन चालक हादसों का शिकार हो रहे हैं। बरसात के दिनों में स्थिति और भी बदतर हो जाती है, जब सड़कों पर जलभराव के चलते रास्ते पहचानना तक मुश्किल हो जाता है। इसके बावजूद विभाग के अधिकारी कुंभकर्णी नींद सोए हुए हैं। स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों द्वारा कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद PWD के जिम्मेदार अधिकारी कान में तेल डाले बैठे हैं। न तो समय पर पैचवर्क कराया जा रहा है और न ही निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की कोई मॉनिटरिंग हो रही है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक जनता इस प्रशासनिक उदासीनता की कीमत चुकाती रहेगी? क्या बड़े हादसे के बाद ही विभाग की आंखें खुलेंगी?


