ब्रेकिंग
मुरैना में सैनिकों के राजस्व प्रकरणों को प्राथमिकता से सुलझाने के निर्देश मुरैना आबकारी विभाग की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल, अवैध शराब के कारोबार पर लगाम कसने में नाकाम महकम... मुरैना खाद्य विभाग की लापरवाही उजागर: जनता के स्वास्थ्य से हो रहा है खिलवाड़ मुरैना युवती को प्रेम जाल में फंसाया, दुष्कर्म किया, वीडियो बनाकर ब्लैकमेल भी तमिलनाडु से मुरैना तक क्राइम का सफर: ₹19 लाख की चोरी की क्रेटा कार के साथ शातिर गिरफ्तार मुरैना सीएनजी टेस्ट क्या फेल हुआ, सिरफिरे ने पेट्रोल पंप पर गोलियां बरसा दीं एक आरोपी गिरफ्तार थाना अम्बाह: एक्सीडेंट में घायल युवक की इलाज के दौरान मौत थाना टेटरा: सर्पदंश से इलाज के दौरान महिला की दर्दनाक मौत भिंड में स्कूली बस और डंपर की टक्कर, सात बच्चे घायल मुरैना में राठी हॉस्पिटल पर हंगामा: इलाज के दौरान महिला की मौत पुलिस बल मौके पर
दिल्ली NCR

 17 दिसंबर से 1 जनवरी तक सुप्रीम कोर्ट बंद

नई दिल्ली । पहली बार सुप्रीम कोर्ट में 17 दिसंबर से 1 जनवरी के बीच कोई भी पीठ सुप्रीम कोर्ट में नहीं बैठेगी। आवश्यक मामलों में भी इन दिनों में कोई सुनवाई नहीं हो सकेगी। सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार यह व्यवस्था की है शीतकालीन अवकाश के दौरान केस की सुनवाई के लिए कोई पीठ सुनवाई नहीं होगी।

 सुप्रीम कोर्ट के ऊपर जिस तरीके से केंद्र सरकार के विधि मंत्री ने कॉलेजियम को लेकर मोर्चा खोला है। उसके बाद से सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के बीच तल्खी बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे हमेशा जरूरी मामलों के लिए खुले रहते थे। आवश्यक होने पर वेकेशन रजिस्टार के समक्ष जाकर प्रकरण दर्ज कराया जा सकता था। रजिस्टार इसकी जानकारी मुख्य न्यायाधीश को देते थे। अर्जेंट मामला होने पर विशेष पीठ गठित कर दी जाती थी।

हाल ही में राज्यसभा में 15 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की लंबी छुट्टियों का मुद्दा उठा था। संसद में अदालत के अवकाश दिवसों में कमी करने की मांग की गई थी।
संविधान पीठ में 500 मामले पेंडिंग

केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजूजी ने लोकसभा में जो लिखित जानकारी दी है। उसके अनुसार संविधान पीठ में 498 मामले लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट में 13 दिसंबर तक 1667 लेबर 487 चुनाव 2870 जनहित याचिका 4321 विशेष अनुमति की याचिकाएं लंबित हैं। संविधान पीठ में कुछ ऐसी याचिकाएं सुनवाई के लिए लंबित हैं। सुनवाई होने के बाद कुछ फैसले के लिए सुरक्षित हैं। कुछ मामलों में जल्द ही सुनवाई होना तय मानी जा रही हैं। जो सरकार के लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं।

Related Articles

Back to top button