ब्रेकिंग
मुरैना में सैनिकों के राजस्व प्रकरणों को प्राथमिकता से सुलझाने के निर्देश मुरैना आबकारी विभाग की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल, अवैध शराब के कारोबार पर लगाम कसने में नाकाम महकम... मुरैना खाद्य विभाग की लापरवाही उजागर: जनता के स्वास्थ्य से हो रहा है खिलवाड़ मुरैना युवती को प्रेम जाल में फंसाया, दुष्कर्म किया, वीडियो बनाकर ब्लैकमेल भी तमिलनाडु से मुरैना तक क्राइम का सफर: ₹19 लाख की चोरी की क्रेटा कार के साथ शातिर गिरफ्तार मुरैना सीएनजी टेस्ट क्या फेल हुआ, सिरफिरे ने पेट्रोल पंप पर गोलियां बरसा दीं एक आरोपी गिरफ्तार थाना अम्बाह: एक्सीडेंट में घायल युवक की इलाज के दौरान मौत थाना टेटरा: सर्पदंश से इलाज के दौरान महिला की दर्दनाक मौत भिंड में स्कूली बस और डंपर की टक्कर, सात बच्चे घायल मुरैना में राठी हॉस्पिटल पर हंगामा: इलाज के दौरान महिला की मौत पुलिस बल मौके पर
मध्यप्रदेश

हड्डी रोग विभाग में सिर्फ 2 डॉक्टर, बिना इलाज लौट जाते हैं कई मरीज

भोपाल: दवा काउंटर और जांच के लिए रोज कतारें।इधर जेपी अस्पताल में भी मरीजों की फजीहत हो रही है। दर्द से कराहते हुए मरीज यहां पहुंचते हैं, लेकिन उनको डॉक्टर ही नहीं मिल पाते। इंतजार के बाद डॉक्टर मिल जाएं तो जांच के लिए लंबी कतार में लगना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी दवा काउंटर पर होती है, जहां कई बार मरीज को आधा घंटे तक कतार में खड़े रहना पड़ता है।यह परेशानी ऑर्थोपेडिक्स डिपार्टमेंट के मरीजों के साथ ज्यादा हो रही है। यहां ऑर्थोपेडिक सर्जन के चार पदों में से दो खाली हैं। दो विशेषज्ञ में से भी एक को कैंसर हुआ है। वे आए दिन मेडिकल लीव पर रहते हैं। अस्पताल में एकमात्र ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. केके देवपुजारी बचते हैं। उन पर ओपीडी और सर्जरी के अलावा दूसरी प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी हैं। इस कारण कई मरीजों को बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ता है।यहां भी परेशानी…3 फॉर्मासिस्ट कम… 11 पद फॉर्मासिस्ट के हैं, लेकिन 8 हैं ही। इनमें से दो सस्पेंड हैं। ऐसे में 4 में 2 काउंटर से दवा वितरण होता है।ड्रेसिंग के लिए वेट… ड्रेसर के 11 पद हैं, लेकिन 8 पदस्थ हैं। इनमें से दाे दूसरे काम रहते हैं। बाकी में से एक-दो वीआईपी ड्यूटी पर होते हैं।जांच में भी इंतजार… लैब टेक्नीशियन के 10 पद हैं। लेकिन, 7 ही तैनात हैं। ऐसे में सैंपल कलेक्शन से लेकर जांच में समय लगता है।डॉ. श्रीवास्तव ने ज्वाइन कर लिया है। डॉ. देवपुजारी के अलावा दो पीजीएमओ आए हैं। स्टाफ की कमी दूर करने के प्रयास कर रहे हैं। -डॉ. राकेश श्रीवास्तव, सिविल सर्जन, जेपी

Related Articles

Back to top button