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मध्यप्रदेश

धार जिले में जर्जर स्थिति में है अंग्रेजों के शासनकाल में बना चंबल नदी का पुल

धार। इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर ग्राम घाटाबिल्लौद में चंबल नदी का पुल जर्जर हो चुका है। वहीं इस पुल से बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही बनी हुई है। करीब 110 वर्ष पहले अंग्रेजों के शासनकाल में बनाए गए पुल का नवीनीकरण करना बेहद जरूरी है। पुल की फर्श की स्थिति भी दयनीय हो चुकी है। वहीं अब इसके पत्थर के कालम भी कमजोर होने लगे हैं। ऐसे में कभी भी कोई हादसा हो सकता है।

पूर्व में नए सिरे से ब्रिज बनाने के लिए जो प्रयास किए गए थे वह प्रयास अब फिर से शुरू करना होंगे। उल्लेखनीय है कि इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर घाटाबिल्लौद बसा हुआ है। इस गांव से अभी भी बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही होती है। खासकर औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर जाने वाले लोगों द्वारा मार्ग का उपयोग किया जाता है।

वर्तमान में इस मार्ग पर चंबल नदी पर एक पुराना पुल है जो अंग्रेजों के शासनकाल में बनाया गया था। तीन दशक पहले पुल का फर्श नए सिरे से बनाया गया था। अब यह फर्श भी बहुत ही दयनीय स्थिति में पहुंच चुका है। इस मार्ग पर लगातार वाहनों की आने-जाने की स्थिति बनी रहती है जिसे बनाए रखने के लिए इस पुल को नया बनाने की आवश्यकता है।

पहले यह हो चुके प्रयास

उल्लेखनीय है कि ब्रिक्स संगठन के माध्यम से नए सिरे से चंबल नदी का पुल बनाने की मंजूरी मिली थी। इसको लेकर लोक निर्माण विभाग की सेतु निर्माण इकाई द्वारा सर्वे भी कर लिया गया था। साथ ही इसकी विस्तृत कार्य योजना तैयार कर ली गई थी। करीब सात करोड़ रुपये में इस नए पुल का निर्माण किया जाना था।

इसके तहत सबसे महत्वपूर्ण रूप से वर्तमान पुल के समानांतर ही पुल को बनाया जाना था। इस योजना के असफल हो जाने के बाद एक बार फिर एशियन डेवलपमेंट बैंक के माध्यम से ब्रिज को बनाने की पहल की गई थी। लेकिन वहां भी असफलता ही हाथ लगी। सात करोड रुपये स्वीकृत नहीं होने के कारण करीब सात वर्ष से नए पुल निर्माण को लेकर नाउम्मीद ही हाथ लगी है जबकि यदि समय पर राशि स्वीकृत हो गई होती तो अभी तक यहां नया पुल बनकर तैयार हो जाता और पुराने पुल को एक धरोहर के रूप में भले ही सुरक्षित रख दिया जाता।

इंदौर अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर ब्रिज निर्माण को लेकर विशेष रूप से आवश्यकता है। यदि समय रहते इसका निर्माण नहीं किया जाता है तो निश्चित रूप से एक बड़ी परेशानी हो सकती है। बताया जा रहा है कि सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके लिए और कौन सा विभाग राशि उपलब्ध कराएगा। सेतु निर्माण इकाई के माध्यम से ही इस पर पहल हो सकती है। फिलहाल इस बारे में सेतु निर्माण इकाई द्वारा कोई भी प्रस्ताव तैयार नहीं किया गया है।

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