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मुरेना राधिका पैलैस में चल रही भागवत् कथा अमृत के तृतीया दिवस भागवताचार्य श्री दर्शन कुमार जी महाराज ने महा भारत का भीष्म प्रसंग व गुरु महत्व बताया

मुरेना राधिका पैलैस में चल रही भागवत् कथा अमृत के तृतीया दिवस भागवताचार्य श्री दर्शन कुमार जी महाराज ने ( रिपोर्ट -दिनेश सिकरवार) मुरेना - नगर मुरेना के राधिका पैलैस में प्रतिष्ठित महेश्वरी परिवार की ओर से दिनांक दस (10 ) अक्टूबर से श्रीमदभागवत् कथा का आयोजन किया जा रहा है बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पवित्र कथा का श्रवण कर रहे हैं , आज तृतीय दिवस के दिन परम् पूज्य गो. 108 श्री गोवर्धनेश जी महोदय श्री (श्री दर्शन कुमार जी) महाराज ने कथा सुनाई .श्रीमद् भागवत् कथान्तर्गत आज बड़े ही सुंदर ढंग से श्री भीष्म स्तुति का वर्णन करते हुए श्री महाप्रभु वल्लभाचार्य जी के वंशज गो. श्री दर्शन कुमार जी महोदय ने बताया कि प्रतिदिन सांय काल इसका पठन करना चाहिए इस स्तुति में इति शब्द को प्रारंभ में लिया गया है, जब कि इति शब्द बाद में आता है। इसका तात्पर्य यह है कि में आप के दर्शन कर अपना शरीर त्याग रहा हूँ। अतः अब मेरे सारे अपराधों की इति होकर में जन्म मरण के बंधन से मुक्त हो जाऊँगा इसी क्रम में आप ने बताया कि अहंकार से किया गया कार्य व्यक्ति को कर्म बंधन में बांधते हैं। एवं भक्तिभाव आनंद की अनुभूति कराता है। जब जीव के अंदर अहमता ममता का भाव रहता है। तो पशु में एवं हमारे अंदर क्या असमानता है। इसलिए हमें अहंमता ममता का त्याग करना चाहिए परीक्षत जी एवं शुकदेव जी के मिलने के अंतर्गत अपने गुरु एवं शिष्य के लक्षण बताए। गुरु में पहला लक्षण ज्ञान, ज्ञान के अनुसार कर्म अव्यग्रता, साधन यह चार लक्षण गुरू आपने बताए हैं। उत्तम सेबक गुरु के सन्मुख श्रद्धा से उपस्थित हो, गुरु को साष्टांग दंडवत करे। गुरू के सम्मुख सावधानी से खडें हों गुरू को निवेदन करने से पहले आज्ञा ले अपनी वांणी से प्रणाम करे। सत वाणी से प्रश्न करे, उपरोक्त लक्षण परीक्षित जी एवं शुकदेव जी में विराजमान हैं।

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