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उत्तरप्रदेश

खुद स्टार्ट किया पम्पिंग सेट, कहा- पशुओं में दूध की होती है वृद्धि

बहराइच: बहराइच के जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चन्द्र और पुलिस अधीक्षक केशव कुमार चौधरी ने अस्थायी गो-आश्रय स्थल कसेहरी बुज़ुर्ग का भ्रमण किया। उन्होंने बोई गई नैपियर घास के खेत को देखा। चरागाह में बोई गई नैपियर घास की प्रगति का जायज़ा लेने पर डीएम ने पाया कि 59 दिवस में ही पूरी तरह से घास के तैयार हो गई है।खण्ड विकास अधिकारी कैसरगंज अजीत कुमार सिंह ने ग्राम प्रधान विनोद गुप्ता और अन्य श्रमिकों के प्रयासों को सराहा। डीएम ने नैपियर घास के खेत को पानी देने के लिए खुद पंपिंग सेट को चालू किया।चरागाह के निरीक्षण के उपरान्त डीएम ने गो-शाला का निरीक्षण कर विभिन्न व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की और एसपी के साथ गोवंश को हरा चारा, फल, गुड खिलाकर गो-सेवा की। डीएम ने किसानों और पशुपालकों से अपील की है कि नैपियर घास एक ऐसी घास है। जिसको एक बार बोने से लगभग 4 से 5 वर्षों तक एक वर्ष में तीन से चार बार कटाई भी की जा सकती है।बहराइच के जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चन्द्र ने पंपिग सेट किया स्टार्ट।12 से 14 प्रतिशत प्रोटीन की मात्रानेपियर घास में 12 से 14 प्रतिशत तक प्रोटीन की मात्रा पायी जाती है। जो पशुओं के लिए बहुत लाभदायक है। इससे पशुओं में दूध की भी वृद्धि होती है। इस घास को छोटे सी जगह तथा मेढ़ पर भी बोया जा सकता है। जिसका तात्पर्य है कि बड़े किसानों से लेकर छोटे किसान भी बो सकते हैं।

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