ब्रेकिंग
तमिलनाडु से मुरैना तक क्राइम का सफर: ₹19 लाख की चोरी की क्रेटा कार के साथ शातिर गिरफ्तार मुरैना सीएनजी टेस्ट क्या फेल हुआ, सिरफिरे ने पेट्रोल पंप पर गोलियां बरसा दीं एक आरोपी गिरफ्तार थाना अम्बाह: एक्सीडेंट में घायल युवक की इलाज के दौरान मौत थाना टेटरा: सर्पदंश से इलाज के दौरान महिला की दर्दनाक मौत भिंड में स्कूली बस और डंपर की टक्कर, सात बच्चे घायल मुरैना में राठी हॉस्पिटल पर हंगामा: इलाज के दौरान महिला की मौत पुलिस बल मौके पर खाकी की साठगांठ या लाचारी? डायल 112 के सामने से निकलते रहे रेत के ट्रैक्टर, एसपी की सख्ती पर 2 आरक्ष... उज्जैन में 11वीं की छात्रा की संदिग्ध मौत: लव जिहाद के आरोप पर हंगामा, सड़क पर शव रखकर चक्काजाम और अ... मुरैना मेडिकल स्टोरों पर औषधि प्रशासन की कार्रवाई तीन मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस निलंबित मुरैना कृष्ण टाउन कॉलोनी में तांडव: घर में घुसकर परिजनों से मारपीट और जान से मारने की खुली धमकी
धार्मिक

कब है नाग पंचमी जानिए तिथि शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

 सनातन धर्म में नाग पंचमी का विशेष महत्व बताया गया है। यह एक प्रकार का उत्सव होता है। इस दिन नाग देवता की पूजा की जाती है। नागों को दूध से स्नान कराया जाता है। इस दिन चांदी के नाग एवं नागदेवता की प्रतीकत्मक तस्वीर की पूजा करते हैं। ऐसी मान्यता है कि नाग देवता की पूजा करने से शिव की कृपा प्राप्ति होती है। ज्योतिष के दृष्टिकोण से देखें तो इस दिन कालसर्प दोष की पूजा होती है। मतलब जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष और राहु दोष होता है वो लोग इस दिन भगवान शिव का रुद्राभिषेक करते हैं। नाग देवता की पूजा का प्रचलन मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार और झारखंड़ जैसे राज्यों में है। आइए जानते हैं कि कब है नाग पंचमी, जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।

नाग पंचमी तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, 7 जुलाई को कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को सुबह 3 बजकर 12 मिनट से नाग पंचमी शुरू होगी और मध्यरात्रि 12 बजकर 19 मिनट पर समाप्त होगी। वहीं, 21 अगस्त को शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 20 अगस्त को रात 12 बजकर 22 मिनट पर पंचमी तिथि शुरू होगी। 21 तारीख को रात में 2 बजकर 1 मिनट पर यह तिथि खत्म हो जाएगी।

राहु और काल सर्प दोष के लिए करें ये काम

1- कुंडली में राहु-केतु के दोष से मुक्ति के लिए नाग देवता की पूजा करना चाहिए।

2.कुंडली में कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए भगवान शिव का इस दिन रुद्राभिषेक करना चाहिए।

3.इस दिन चांदी की नाग-नागिन नदी में प्रवाहित करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है।

4.नागपंचमी के दिन व्रत करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है।

5.इस दिन ब्राह्मण और जरूरतमदों को दान करना चाहिए। ऐसा करने से राहु-केतु के अशुभ प्रभाव से मुक्ति मिलती है।

डिसक्लेमर

‘इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।’

Related Articles

Back to top button