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रिम्स में हड़ताल से 28 मरीजों की हुई मौत

रांची। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजय कुमार मिश्रा व जस्टिस आनंद सेन की खंडपीठ में रिम्स में जूनियर डाक्टर्स और नर्सों की हड़ताल की वजह से 28 मरीजों की मौत मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने मामले में सेवानिवृत्त जिला जज की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाने का निर्देश दिया है। अदालत ने सरकार से उक्त कमेटी को लेकर जवाब मांगा है।

कोर्ट ने सरकार से कार्रवाइ को लेकर पूछे सवाल

मामले में अगली सुनवाई चार मई को निर्धारित की गई है। इस संबंध में झारखंड छात्र संघ ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है। याचिका में हड़ताल के दौरान मरीजों की मौत के लिए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई है।

पिछली सुनवाई में अदालत ने राज्य सरकार से पूछा था कि हड़ताल के दौरान मरीजों की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई की गई थी। मृतकों के परिजनों को मुआवजा दिया गया है या नहीं। उनके पुनर्वास को लेकर कोई पहल हुई या नहीं।

रिम्‍स ने सफाई में कही किसी भी मरीज की मौत न होने की बात

रिम्स की ओर से अदालत को बताया गया कि हड़ताल के कारण किसी मरीज की मौत नहीं हुई है। जूनियर डाक्टर्स और नर्स हड़ताल पर थीं। सीनियर डाक्टर ट्रामा सेंटर में गंभीर मरीजों का इलाज कर रहे थे। इमरजेंसी में भी डाक्टर मरीज को देख रहे थे। रिम्स में गंभीर बीमारी से ग्रसित लोग आते हैं। ऐसे में कई लोगों की मौत होती ही रहती है। प्रार्थी के अधिवक्ता ने इसका विरोध किया।

साल 2018 का है पूरा मामला

बता दें कि जून 2018 में रिम्स में चिकित्सक और मरीज के परिजनों के बीच विवाद के बाद जूनियर डाक्टर्स एवं नर्सों ने हड़ताल पर चले गए। मामले में कोतवाली थाना में जूनियर डाक्टर्स एवं नर्स के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई थी। अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

 

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