ब्रेकिंग
तमिलनाडु से मुरैना तक क्राइम का सफर: ₹19 लाख की चोरी की क्रेटा कार के साथ शातिर गिरफ्तार मुरैना सीएनजी टेस्ट क्या फेल हुआ, सिरफिरे ने पेट्रोल पंप पर गोलियां बरसा दीं एक आरोपी गिरफ्तार थाना अम्बाह: एक्सीडेंट में घायल युवक की इलाज के दौरान मौत थाना टेटरा: सर्पदंश से इलाज के दौरान महिला की दर्दनाक मौत भिंड में स्कूली बस और डंपर की टक्कर, सात बच्चे घायल मुरैना में राठी हॉस्पिटल पर हंगामा: इलाज के दौरान महिला की मौत पुलिस बल मौके पर खाकी की साठगांठ या लाचारी? डायल 112 के सामने से निकलते रहे रेत के ट्रैक्टर, एसपी की सख्ती पर 2 आरक्ष... उज्जैन में 11वीं की छात्रा की संदिग्ध मौत: लव जिहाद के आरोप पर हंगामा, सड़क पर शव रखकर चक्काजाम और अ... मुरैना मेडिकल स्टोरों पर औषधि प्रशासन की कार्रवाई तीन मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस निलंबित मुरैना कृष्ण टाउन कॉलोनी में तांडव: घर में घुसकर परिजनों से मारपीट और जान से मारने की खुली धमकी
मध्यप्रदेश

पुलिस की लोगों से अपील- एड्स संक्रमित मरीज से नहीं करें भेदभाव

हरदा: विश्व एड्स दिवस के अवसर जिला मुख्यालय पर पुलिस कंट्रोल रूम में कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान एसपी मनीष कुमार अग्रवाल ने एड्स के लक्षण और उनके फैलने के कारण के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एड्स हाथ मिलाने से नहीं फैलता, असुरक्षित यौन संबंध से बचे और खून देने या लेने पर नई सुई के इस्तेमाल की अनिवार्यता पर बल दिया।एसपी अग्रवाल ने बताया कि पुलिस लोगों को एड्स के प्रति जागरूक भी करेगी। साथ ही इस बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों का हौंसला बढ़ाने का काम भी करेगी। ताकि इस बीमारी से संक्रमित व्यक्ति इस खतरनाक बीमारी को मात दे सकें। एड्स जानलेवा बीमारी है, इस बीमारी का अभी तक इलाज संभव नहीं हो पाया है। इस रोग को मात देने के लिए बचाव ही बेहतरीन उपाय है। रेड रीबन HIV पॉजिटिव लोगों के साथ एकजुटता और एड्स के साथ जी रहे लोगों के लिए वैश्विक प्रतीक है। इसी को लेकर पुलिस जवानों ने एक-दूसरे को रेड रबिन बांधा। कार्यशाला में एएसपी राजेश्वरी महोबिया, टीआई राकेश गौर, अनिल राठौर, गाजीवति पुषाम, वर्षा गौर, आरआई अनिल कवरेती सहित अन्य पुलिसकर्मी मौजूद रहे।वर्ल्ड एड्स-डे 2022 की थीमविश्व एड्स दिवस 2022 की थीम ‘एक्युलाइज यानी समानता’ रखी गई है। दरअसल जो लोग एड्स से पीड़ित होते हैं, उन्हें समाज में भेदभाव का सामना करना पड़ता है। लोगों को लगता है कि यह छूआछूत की बीमारी है, जबकि ऐसा नहीं है। इस साल की थीम, भेदभाव को खत्म कर के हर उस व्यक्ति को सम्मान करने पर जोर दिया गया है, जो इस बीमारी से पीड़ित है या जिन्होंने इस रोग के कारण अपनी जान गंवाई है।

Related Articles

Back to top button