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जमीनी नेता, कर्मठ कार्यकर्ता – भाजपा के सच्चे सिपाही राघवेंद्र उपाध्याय
मुरैना। कहते हैं राजनीति विरासत से नहीं, संघर्ष और सेवा से मिलती है। इस कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं मुरैना के युवा भाजपा नेता राघवेंद्र उपाध्याय। राघवेंद्र उपाध्याय ऐसे परिवार से आते हैं जहां जनसेवा परंपरा रही है। उनके पिता तीन बार नगर निगम में पार्षद रह चुके हैं और एक बार माताजी भी पार्षद निर्वाचित हुई है लेकिन राघवेंद्र ने अपना अलग रास्ता चुना। भाजपा के निष्ठावान सिपाही राघवेंद्र उपाध्याय ने भाजपा के एक कर्मठ, समर्पित कार्यकर्ता के रूप में काम किया है। इन्होंने वर्ष 1999 में भाजपा युवा मोर्चा जिला कार्यसमिति सदस्य के दायित्व पर रहकर संगठनात्मक राजनीतिक पारी की शुरुआत की। पार्टी में लंबे समय तक संघर्ष जारी रखा,इन्होंने कभी भी राजनीतिक पद की लालसा नहीं की,बल्कि संगठन के लिए जमीनी स्तर पर काम करना उनका स्वभाव है। उनकी इसी योग्यता को देखते हुए भाजपा जिला कार्यकारिणी ने उन्हें कार्य समिति का सदस्य बनाकर नवाजा है। राघवेंद्र उपाध्याय की पहचान एक ऐसे जननेता के रूप में है जो सुबह से शाम तक लोगों के बीच रहते हैं। चाहे नाली-पानी की समस्या हो, कोई शासकीय विभाग में कार्य हो या किसी गरीब की व्यक्तिगत परेशानी, वे कंधे से कंधा मिलाकर लोगों के साथ खड़े नजर आते हैं। वे सक्रिय रूप से लोगों की समस्याओं को सुनते हैं, अधिकारियों तक पहुंचाते हैं और निजात दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास करते हैं। इसी कारण आज वे मुरैना में एक अच्छे युवा राजनीतिक योद्धा और जनता के सच्चे हमदर्द के रूप में उभरे हैं। भाजपा को ऐसे ही जमीनी कार्यकर्ताओं की जरूरत है जो बिना किसी स्वार्थ के संगठन और समाज दोनों को मजबूत करें।



