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मुरैना जनता तैरती रही पानी में, ‘वीआईपी साहब’ बैठे रहे साइकिल की सवारी पर! आपदा में संवेदनाएं हुईं तार-तार: बाढ़ पीड़ितों का दर्द बांटने पहुंचे नेताजी ने खुद को मान लिया राजा!

मुरैना/अम्बाह: कुदरत के कहर से कराहते बाढ़ पीड़ितों के आंसू पोछने गए एक जनप्रतिनिधि की संवेदनशीलता का जनाजा उस वक्त निकल गया, जब उनका "शाही अंदाज" कैमरे में कैद हो गया। मुरैना के वार्ड क्रमांक 5 से जिला पंचायत सदस्य रेशमा देशराज कुशवाह के पति का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है, जिसमें उनकी संवेदनहीनता की इंतहा साफ देखी जा सकती है। तस्वीरें चीख-चीखकर बयां कर रही हैं कि जहां एक ओर आम ग्रामीण बाढ़ के उफनते पानी और जानलेवा रास्तों के बीच अपनी जिंदगी बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है, वहीं दूसरी ओर "जनाब" पानी में उतरने की जहमत उठाने के बजाय एक गरीब ग्रामीण से अपनी साइकिल खिंचवाते हुए उस पर सवार नजर आए। शर्मनाक नजारा: खुद संघर्ष करता रहा ग्रामीण, तसल्ली से बैठे रहे 'साहब' वीआईपी संस्कृति का खुला प्रदर्शन: बाढ़ की इस विभीषिका में जहां जनता को मदद और हमदर्दी की जरूरत थी, वहां नेताजी अपना रुतबा दिखाने से बाज नहीं आए। मजबूरन मजदूरी जैसा बर्ताव: पानी और कीचड़ के बीच एक ग्रामीण अपनी साइकिल को बमुश्किल संभालते हुए आगे बढ़ रहा था, और पीछे बैठे नेताजी ऐसे मुदित नजर आ रहे थे मानो किसी शाही सवारी पर निकले हों। आहत हुईं भावनाएं: संकट के समय जनप्रतिनिधियों से जिस मानवीय दृष्टिकोण की उम्मीद की जाती है, इस घटना ने उस पर करारा तमाचा जड़ दिया है। "जब पूरा इलाका पानी में डूबा है और लोग एक-एक कदम फूंक-फूंक कर रख रहे हैं, तब जनप्रतिनिधि का यह वीआईपी रवैया उनकी ओछी मानसिकता और जनता के प्रति उनकी संवेदनहीनता को बेनकाब करता है।" जनता का सवाल—क्या आपदा भी नेताओं के मजे लेने का जरिया है? स्थानीय ग्रामीणों में इस घटना के बाद उबाल है। जनता पूछ रही है कि क्या बाढ़ पीड़ितों का हाल जानने का मतलब उनके जख्मों पर नमक छिड़कना है? जब आम इंसान अपनी जान जोखिम में डालकर रास्ता पार कर रहा था, तब इन तथाकथित नुमाइंदों के पैर पानी में भीगने से क्यों कांप गए? यह वीडियो सिर्फ एक वायरल क्लिप नहीं, बल्कि उस सिस्टम और नेताओं के माथे पर कलंक है जो चुनाव के वक्त जनता के पैर छूते हैं और आपदा आने पर उन्हीं के कंधों और साइकिल पर सवारी गांठते हैं। (फिलहाल इस अमानवीय कृत्य पर जनप्रतिनिधि पक्ष की तरफ से कोई सफाई सामने नहीं आई है, लेकिन जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है।)

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