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मुरैना आबकारी विभाग की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल, अवैध शराब के कारोबार पर लगाम कसने में नाकाम महकमा
आबकारी विभाग की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल, अवैध शराब के कारोबार पर लगाम कसने में नाकाम महकमा राज्य में आबकारी विभाग की कार्यशैली लगातार सवालों के घेरे में है। विभाग का मुख्य उद्देश्य अवैध मदिरा की तस्करी रोकना और राजस्व बढ़ाना है, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। प्रदेश के कई जिलों में अवैध शराब का कारोबार धड़ल्ले से फल-फूल रहा है, जिसपर रोक लगाने में विभागीय अधिकारी पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी चौराहों तक अवैध और जहरीली शराब आसानी से उपलब्ध है। इसके बावजूद जिम्मेदार अमूक मौन साधे बैठा है। कई बार स्थानीय नागरिकों की शिकायतों के बाद भी सिर्फ औपचारिकता निभाकर मामले को दबा दिया जाता है। इससे न केवल सरकारी राजस्व को भारी चूना लग रहा है, बल्कि आम जनमानस की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है। अवैध शराब माफियाओं और भ्रष्ट तंत्र की इस कथित मिलीभगत ने विभाग की साख को गहरा धक्का पहुंचाया है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। अब देखना यह होगा कि शासन इस लचर व्यवस्था पर क्या कार्रवाई करता है।


