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मार्गशीर्ष अमावस्या 12 दिसंबर को, धृति योग का होगा निर्माण, जानें इसका महत्व

इंदौर। हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है और इस दिन कई भक्त उपवास रखते हैं और पवित्र नदी में स्नान करते हैं। पौराणिक मान्यता है कि अमावस्या और पूर्णिमा तिथि पर यदि पवित्र नदी में स्नान किया जाता है तो सभी पापों से मुक्ति मिलती है। अमावस्या तिथि पर यदि विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और अमोघ फल की प्राप्ति होती है। पंडित चंद्रशेखर मलतारे के मुताबिक, Margashirsha Amavasya पर शुभ मुहूर्त में पूजा करते समय इन बातों की सावधानी रखनी चाहिए।

Margashirsha Amavasya पर पूजा का शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के मुताबिक, मार्गशीर्ष महीने की अमावस्या तिथि 12 दिसंबर को सुबह 06.24 बजे शुरू होगी और इस तिथि का समापन 13 दिसंबर को 05.01 बजे होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, Margashirsha Amavasya 12 दिसंबर को ही मनाई जाएगी। पंचांग के मुताबिक, 12 दिसंबर को ही शाम को 06.52 मिनट तक धृति योग रहेगा। इस योग में भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।

ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा

  • मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में जाग कर स्नान करें।
  • भगवान विष्णु को प्रणाम कर व्रत का संकल्प लें।
  • सुबह सूर्य देव को जल का अर्घ्य दें और तिलांजलि दें।
  • सुबह पवित्र नदी में स्नान के दौरान हथेली में तिल रखकर बहती जलधारा में प्रवाहित करें।
  • पंचोपचार के बाद विधि विधान से भगवान विष्णु की पूजा करें।
  • विष्णु चालीसा का पाठ करें और विष्णु स्तोत्र का जाप करें।
  • पूजा के बाद अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार दान-पुण्य करें।

डिसक्लेमर

‘इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।’

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