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मध्यप्रदेश

नाजुक कलाइयों ने थामी हैवी बाइक्स, लोगों को कर देती हैं दंग

भोपाल। यूं तो आज के दौर में महिलाओं को मोपेड गाड़ी को सड़क पर दौड़ते देखा जा सकता है, लेकिन शहर में कई ऐसी महिलाएं व युवतियां भी हैं, जिनके लिए हैवी बाइक चलाना पैशन बना गया है। करीब 200 किलोग्राम की बाइक पर सवार होकर जब वो शहर की सड़क पर उतरती हैं तो लोग उन्हें देखते रह जाते हैं। इस तरह वह राजधानी में महिला सशक्तीकरण का संदेश भी देती हैं। उनके अनुसार हैवी बाइक चलाना उनके लिए आजादी का प्रतीक है। ये महिला बाइक राइडर्स, प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी बाइक से यात्रा कर चुकी हैं। इन्होंने नवदुनिया से अपने अनुभव साझा किए।

यातायात नियम, महिला सशक्तीकरण का देती हैं संदेश

एक निजी कंपनी में कार्यरत नेहा पाटिल पिछले सात वर्ष से हैवी बाइक चला रही हैं। वह सोलो और समूह में राइड करती हैं। वह बताती हैं कि मेरे पास तीन हैवी बाइक हैं, जिनका वजन लगभग 200 किलोग्राम है। बाइक से ही आफिस जाती हूं। बाइक चलाने की प्रेरणा मुझे बड़े भाई से मिली। बाइक चलाना मेरा पैशन है। मैं महिला सशक्तीकरण, हेलमेट, यातायात नियम और सुरक्षा जागरूकता के लिए आयोजित होने वाली बाइक रैली में भी हिस्सा लेती हूं। मैं बाइक से गोवा और गुजरात जा चुकी हूं।

बढ़ता है आत्मविश्वास

पेशे से शिक्षिका शिवानी दुबे पिछले चार वर्ष से हैवी बाइक चला रही हैं। उनके पास हिमालयन 1250 सीसी बाइक है। वह कहती हैं कि मैं ज्यादातर ग्रुप राइड करती हूं। मप्र के ज्यादातर शहरों में बाइक से यात्रा की है। जब मैं हैवी बाइक चलाती हूं तो आत्मविश्वास बढ़ता है, आजादी का अहसास होता है। ऐसा लगता है कि हम महिलाएं कुछ भी कर सकती हैं। जब पहली बार बाइक चलाई थी तब डर लगा था, लेकिन धीरे-धीरे डर दूर हो गया। बाइक चलाने के दौरान सेफ्टी का बहुत ध्यान रखना पड़ता है। हेलमेट, जैकेट, राइडिंग बूट के साथ ही हैवी बाइक चलाना चाहिए।

हेलमेट लगाने लोगों से करती हूं अपील

कोलार के ललिता नगर निवासी श्रेयशी अग्रवाल के पास क्लासिक 350 है। इससे उन्होंने भोपाल से पतालकोट, पंचपढ़ी, गुजरात, मांडू, महेश्वर जा चुकी हैं। वह ज्यादातर समूह में राइड करती हैं, लेकिन सोलो के लिए इंदौर चली जाती हैं। वह एक स्कूल में बालीवाल कोच हैं। वह कहती हैं कि जब बाइक लेकर जाती हूं तो लोग देखने लगते हैं, जिससे मुझे खुशी मिली है। आत्मविश्वास और मनोबल भी बढ़ता है। सबसे पहले मोपेड चलाती थी लेकिन लाकडाउन के बाद हैवी बाइक खरीदी। मैं तीन साल से बाइक चला रही हूं। साथ ही लोगों को हेलमेट लगाने की अपील भी करती हूं।

काम के साथ शौक को पूरा करती हूं

अर्शिता चौहान बैंक में नौकरी करती हैं। वह पिछले दो वर्षों से हैवी बाइक चला रही हैं। उन्हें बाइक चलाने की प्रेरणा एक दोस्त से मिली, उन्होंने अर्शिता को एक बाइक से जोड़ा, इसके बाद वह निरंतर बाइक चलाने लगीं। वह बताती हैं कि मेरे पास हंटर 350 है। जब मैं बाइक चलाती हूं तो दूसरी युवतियां भी प्रेरित होती है। मैं अपने काम के साथ शौक को पूरा करती हूं। मैंने प्रदेश के ज्यादातर शहरों में बाइक से यात्रा की है, जिसमें यादगार अनुभव भी मिला। बाइक से दो बार गोवा और एक बार उदयपुर जा चुकी हूं।

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