ब्रेकिंग
तमिलनाडु से मुरैना तक क्राइम का सफर: ₹19 लाख की चोरी की क्रेटा कार के साथ शातिर गिरफ्तार मुरैना सीएनजी टेस्ट क्या फेल हुआ, सिरफिरे ने पेट्रोल पंप पर गोलियां बरसा दीं एक आरोपी गिरफ्तार थाना अम्बाह: एक्सीडेंट में घायल युवक की इलाज के दौरान मौत थाना टेटरा: सर्पदंश से इलाज के दौरान महिला की दर्दनाक मौत भिंड में स्कूली बस और डंपर की टक्कर, सात बच्चे घायल मुरैना में राठी हॉस्पिटल पर हंगामा: इलाज के दौरान महिला की मौत पुलिस बल मौके पर खाकी की साठगांठ या लाचारी? डायल 112 के सामने से निकलते रहे रेत के ट्रैक्टर, एसपी की सख्ती पर 2 आरक्ष... उज्जैन में 11वीं की छात्रा की संदिग्ध मौत: लव जिहाद के आरोप पर हंगामा, सड़क पर शव रखकर चक्काजाम और अ... मुरैना मेडिकल स्टोरों पर औषधि प्रशासन की कार्रवाई तीन मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस निलंबित मुरैना कृष्ण टाउन कॉलोनी में तांडव: घर में घुसकर परिजनों से मारपीट और जान से मारने की खुली धमकी
देश

ट्रांसप्लांट के लिए पुणे से फेफड़ा लेकर चेन्नई जा रही एंबुलेंस हुई दुर्घटनाग्रस्त , टायर फटने से बिगड़ा बैलेंस

पुणे के पास एक अस्पताल से फेफडों को ले जा रही एक एंबुलेंस शहर के हवाई अड्डे के रास्ते में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हालांकि, एक सर्जन और उनकी टीम की सुझबुझ से चेन्नई में एक मरीज की जान बच गई, जहां कुछ घंटों बाद फेफड़े का सफलतापूर्वक ट्रांसप्लांट किया गया। यह घटना सोमवार को पुणे के पास पिंपरी चिंचवड़ उपनगर में हुई।

जाने-माने हृदय और फेफड़े के ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. संजीव जाधव और उनकी मेडिकल टीम ने कहा कि दुर्घटना में उन्हें चोटें आईं, लेकिन उन्होंने चेन्नई में 26 वर्षीय मरीज के फेफड़े का सफलतापूर्वक ट्रांसप्लांट किया। नवी मुंबई के अपोलो अस्पताल के मुख्य कार्डियोथोरेसिक सर्जन डॉ. जाधव ने कहा कि पिंपरी चिंचवड़ में हैरिस ब्रिज पर एक टायर फटने के कारण उनकी एम्बुलेंस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी।

उन्होंने बताया कि उन्होंने समय बर्बाद किए बिना एंबुलेंस के पीछे चल रही वाहन पर चढ़कर पुणे हवाई अड्डे पर पहुंचे, जहां एक चार्टर्ड विमान चेन्नई जाने के लिए रूका था। उन्होंने आत्महत्या करने वाले 19 वर्षीय एक युवक के फेफड़े को सोमवार को पिंपरी चिंचवड़ के डीवाई पाटिल अस्पताल में निकाला था।

डॉक्टर ने बताया कि अंग को चेन्नई स्थित अपोलो अस्पताल में ले जाया जाना था, जहां एक मरीज के फेफड़े का ट्रांसप्लांट होना था। उन्होंने कहा, निकाले गए अंग की व्यवहार्यता आम तौर पर छह घंटे होती है और उस अवधि के भीतर, अंग का ट्रांसप्लांट हो जाना चाहिए, इसलिए रोगी के ट्रांसप्लांट सर्जरी के लिए अंग को चेन्नई ले जाना जरूरी था।

Related Articles

Back to top button