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मध्यप्रदेश

कपास और मिर्च के बीच हो रही थी गांजे की खेती, 118 पौधे जब्त

खरगोन। जिला मुख्यालय से 50 किमी दूर भीकनगांव क्षेत्र के डवला फालिया में कपास और मिर्च की फसल के बीच गांजे की खेती की जा रही थी। पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए 74 किलोग्राम के 118 गांजे के हरे पौधों को जब्त किया है। आरोपित किसान फरार है। गांजे का मूल्य करीब डेढ़ लाख रुपये बताया जा रहा है।

एसपी धर्मवीर सिंह यादव ने बताया कि जिले में मादक पदार्थों की खेती और परिवहन के बारे में पुलिस लगातार सर्चिंग कर रही थी। इसके चलते शुक्रवार को मुखबिर की सूचना पर भीकनगांव पुलिस ने टीम का गठन किया। मुखबिर के अनुसार गोरेलाल निवासी ग्राम डवाला फाल्या औरंगपुरा ने अपने घर के पास खेत में कपास और मिर्च की फसल के बीच अवैध गांजे के पौधे लगा रखे हैं। मुखबिर की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची तो आरोपित किसान फरार हो गया।

वहीं जब टीम ने गोरेलाल के खेत के बीच जाकर देखा तो कपास और मिर्च के बीच अवैध गांजे के हरे पत्तेदार पौधे पाए गए। पुलिस ने मौके से 118 गांजे के पौधे जब्‍त किए हैं, जिसका वजन 74 किलो 92 ग्राम है। पुलिस ने आरोपित गोरेलाल के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज किया है।

कटाई करने में लगे आठ घंटे

गांजे की पौधों की कटाई के दौरान ही पुलिसकर्मियों को आठ घंटे से अधिक का समय लगा। पुलिसकर्मियों को पौधों की कटाई करने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

महाराष्ट्र, राजस्थान के लोग किराए से खेती करवाते हैं

जिले में गांजे की खेती के लिए भगवानपुरा कुख्यात है। इसके अलावा भीकनगांव और झिरन्या में भी गांजे की खेती की जाती है। सबसे ज्यादा खेती भगवानपुरा में खेती होती है। यहां के आदिवासी किसान खेती करते हैं। इसके अलावा राजस्थान, महाराष्ट्र के दलाल लोग भी यहां सक्रिय रहते हैं। वह किराए पर खेती करवाते हैं। गांजे की फसल पकने के बाद उसे लेकर चले जाते हैं।

शहर में कई जगह गांजे की बिक्री

शहर में कई जगह चोरी छिपे गांजे की बिक्री होती है। संजय नगर, मोतीपुरा, पहाड़ सिंहपुरा, छोटी मोहन टाकिज, औरंगपुरा, रहीमपुरा, सुखपुरी, बावड़ी बस स्टैंड क्षेत्र, जैतापुर, बिस्टान नाका में गांजा बिक रहा है। यहां पुड़ियों में गांजा बेचा जाता है।

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