ब्रेकिंग
खाकी की साठगांठ या लाचारी? डायल 112 के सामने से निकलते रहे रेत के ट्रैक्टर, एसपी की सख्ती पर 2 आरक्ष... उज्जैन में 11वीं की छात्रा की संदिग्ध मौत: लव जिहाद के आरोप पर हंगामा, सड़क पर शव रखकर चक्काजाम और अ... मुरैना मेडिकल स्टोरों पर औषधि प्रशासन की कार्रवाई तीन मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस निलंबित मुरैना कृष्ण टाउन कॉलोनी में तांडव: घर में घुसकर परिजनों से मारपीट और जान से मारने की खुली धमकी आरक्षण, गरीबी और उपेक्षा: हाशिए पर खड़ा सवर्ण समाज कब तक सहेगा चुप्पी का दर्द : महिपाल मकवाना ग्वालियर यूनिवर्सिटी थाना क्षेत्र में तेज रफ्तार कार ने ढाया कहर, ऑटो मे मारी टक्कर ऑटो पलटने से तीन... भोपाल एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन जारी, भोपाल अवैध शराब के खिलाफ पूरे प्रदेश में विशेष अभियान लापरवाही पर अफसरों की होगी जवाबदेही तय मुरैना: एसपी धर्मराज मीना की मानवीय पहल, बीमार मां के इलाज के लिए दिए ₹1 लाख सरकारी योजनाओं पर लग रहा पलीता: धरातल पर दम तोड़ रही जनहितैषी नीतियां
मध्यप्रदेश

खंडवा में है श्रीदुग्धेश्वर महादेव मंदिर प्रकृति खुद करती है भोलेनाथ का अभिषेक

खंडवा। खंडवा में दूध तलाई क्षेत्र स्थित दुग्धेश्वर महादेव मंदिर में प्रकृति स्वयं भगवान शिव का जलाभिषेक करती हुई नजर आती है। यह मंदिर श्रावण माह में श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां प्रतिदिन क्षेत्रवासियों सहित आसपास से भी श्रद्धालु दर्शनों के लिए पहुंच रहे हैं।

श्रीदुग्धेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास

श्रीदुग्धेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास पांडवकालीन काल का माना जाता है। मंदिर के आसपास वर्षों पुरानी खंडित मूर्तियां रखी हुईं हैं, जो मंदिर के प्राचीन होने का प्रमाण देती है। यहां स्थित शिवलिंग स्वयं भू हैं। यह शिवलिंग कुंड में विराजित है और भूजल से भगवान शिव का अभिषेक निरंतर होता रहता है।

श्रीदुग्धेश्वर महादेव मंदिर की विशेषता

दूध तलाई के पास स्वयं-भू शिवलिंग होने के कारण श्रीदुग्धेश्वर महादेव मंदिर नाम पुकारा जाने लगा। मंदिर में भगवान श्रीगणेश, माता पार्वती, नंदीगण सहित अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं। मान्यता है कि मंदिर में दर्शन करने मात्र से श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी हो जाती हैं।

यह शिव मंदिर वर्षों पुराना है। कुंड में स्थित यह शिवलिंग पत्थर की शिला पर स्वयं भू है। पूर्व में यह गोबर और कचरे में दबा था। मोगा परिवार के लड़कों ने यहां सफाई कराई तो शिवलिंग के साथ ही खंडित मूर्तियां भी निकलीं।इसके बाद जनसहयोग से यहां मंदिर का निर्माण कराया गया। – मालती चौरे, सेवादार

अतिप्राचीन इस शिवलिंग के दर्शन मात्र से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। मंदिर में आत्मिक शांति मिलती है। श्रावण माह में ही नहीं बल्कि सामान्य दिनों में भी इस प्राचीन मंदिर में दर्शनों के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। – रामप्यारी चौहान

Related Articles

Back to top button