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बुरहानपुर के चर्चित केस में कोर्ट ने आरोपी को किया बरी तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म व हत्या का था मामला

बुरहानपुर। शाहपुर थाना क्षेत्र के मोहद गांव निवासी पिंटया उर्फ विजय प्रजापति को तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में बुरहानपुर की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी। इस फैसले को पिंटया ने हाईकोर्ट जबलपुर में चुनौती देते हुए याचिका लगाई थी। गत 21 जून को हाईकोर्ट की जस्टिस संजय पाल और जस्टिस एके पालीवाल की बेंच ने फैसला सुनाते हुए पिंटया उर्फ विजय को दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय ने पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस एक भी ऐसा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाई जो विजय को दोषी ठहरा सके। हाईकोर्ट ने बुरहानपुर के तत्कालीन विशेष न्यायाधीश पर भी टिप्पणी की है। अब सरकार की ओर से इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी की जा रही है। जिले के इतिहास में संभवत: यह पहला मामला है, जब फांसी पाए किसी आरोपित को दोषमुक्त किया गया है।

यह हुआ था घटनाक्रम

पिंटया की ओर से फास्ट ट्रैक कोर्ट में पैरवी करने वाले अधिवक्ता जितेंद्र वैष्णव ने बताया कि 15 अगस्त 2018 को एक तीन साल की बच्ची का शव मिला था। पुलिस ने शक के आधार पर पिंटया को गिरफ्तार कर दुष्कर्म और हत्या का प्रकरण दर्ज कर लिया था। विशेष न्यायालय ने करीब सात माह तक प्रकरण में सुनवाई की और आठ मार्च 2019 को पिंटया को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम और डीएनए रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं की गई थी।

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