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इस बार पांच महीने का होगा चातुर्मास जानें देवशयनी से लेकर देवउठनी एकादशी की तारीख

 रायपुर। विवाह के लिए अब केवल दो शुभ मुहूर्त बचे हैं। 27 और 28 जून को विवाह मुहूर्त के पश्चात 29 जून को देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi ) से चातुर्मास का शुभारंभ होगा। भगवान विष्णु के क्षीरसागर में जाने और विश्राम करने की परंपरा निभाई जाएगी। चूंकि चातुर्मास में वैवाहिक संस्कार संपन्न नहीं किए जाते, इसलिए विवाह के लिए चातुर्मास समाप्त होने तक कोई मुहूर्त नहीं है। इस बार हिंदू संवत्सर का सावन महीना दो बार होने से चातुर्मास भी पांच माह तक चलेगा। पांच माह तक शुभ संस्कारों पर रोक लग जाएगी। इस दौरान केवल धार्मिक कथाओं का वाचन, पूजा, पाठ करना श्रेष्ठ माना जाता है।

देवउठनी एकादशी के बाद शुभ मुहूर्त

ज्योतिषाचार्य डा.दत्तात्रेय होस्केरे के अनुसार 29 जून को देवशयनी एकादशी है। ऐसी मान्यता है कि आषाढ़ शुक्ल एकादशी के दिन भगवान विष्णु पाताल लोक में विश्राम करने चले जाते हैं। इसीलिए इसे देवशयनी एकादशी कहा जाता है। चार माह तक विश्राम के पश्चात कार्तिक शुक्ल एकादशी को भगवान के विश्राम काल का समापन होता है, इस दिन देवगण जागते हैं, इसलिए इसे देवउठनी एकादशी कहते हैं। 23 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के स्वरूप शालिग्राम एवं तुलसी का विवाह की परंपरा निभाई जाएगी। इसके पश्चात ही पुन: विवाह एवं अन्य शुभ संस्कार प्रारंभ होंगे।

इस साल के शुभ मुहूर्त

नवंबर – 24, 27, 28 और 29

दिसंबर – 3, 4, 5, 6, 7, 9, 10, 13, 14, 15

श्रावण माह दो बार

इस साल 2023 के हिंदू संवत्सर 2080 में श्रावण महीना दो बार पड़ रहा है, अर्थात 59 दिनों तक श्रावण माह रहेगा। एक अतिरिक्त महीने को पवित्र पुरुषोत्तम महीना कहा जाता है। इस दौरान पूजा, पाठ, को महत्व दिया जाता है। श्रावण महीना 4 जुलाई से प्रारंभ होकर 31 अगस्त तक चलेगा। शुरू के 15 दिन और आखिरी के 15 दिनों को साधारण श्रावण मास के रूप में मनाएंगे। इसके बीच के 30 दिनाें को पुरुषोत्तम महीना के रूप में मनाया जाएगा। साधारण श्रावण महीना 4 जुलाई से 17 जुलाई और फिर 17 अगस्त से 31 अगस्त तक मनाया जाएगा। वहीं 18 जुलाई से 17 अगस्त के बीच का समय पुरुषोत्तम महीना होगा।

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