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ग्राम गुर्जा में चल रही भागवत कथा के द्वितीय दिवस में पूज्य महाराज श्री द्वारा परीक्षित जन्म व शुकदेव आगमन भक्तिमय प्रसंग सुनाया गया कथा सुन श्रोता भक्त हुऐ भावुक।

हम सबके जीवन में भी महाराज परीक्षित की तरह सात दिन शेष मुरैना। भागवत कथा के द्वितीय दिवस में भगवताचार्य डां सुरेश शास्त्री जी वृंदावन द्वारा महाराज परीक्षित का जन्म व सुखदेव के आगमन की कथा सुनाई यह कथा ग्राम गुर्जा तेहसील जौरा जिला मुरैना में स्वर्गीय नबाब सिंह सिकरवार की स्मृति में चल रही है कथा के परिक्षित श्री मती बिटोली देवी - ठा सोबरन सिंह सिकरवार गुर्जा बाले है कथा 8 जनवरी से शुरू है जो 14 जनवरी तक चलेगी 15 जनवरी को पूर्ण आहुति भंडारा है कथा समय दोपहर 12 से बजे तक है कथा में पूज्य महाराज श्री ने बताया कि परीक्षित जन्म, सुखद। उन्होंने युद्ध में गुरु द्रोण के मारे जाने से क्रोधित होकर उनके पुत्र अश्वत्थामा ने क्रोधित होकर पांडवों को मारने के लिए ब्रह्मास्त्र चलाया। ब्रह्मास्त्र से लगने से अभिमन्यु की गर्भवती पत्नी उत्तरा के गर्भ से परीक्षित का जन्म हुआ। परीक्षित जब बड़े हुए नाती पोतों से भरा पूरा परिवार था। सुख वैभव से समृद्ध राज्य था। वह जब 60 वर्ष के थे। एक दिन वह क्रमिक मुनि से मिलने उनके आश्रम गए। उन्होंने आवाज लगाई, लेकिन तप में लीन होने के कारण मुनि ने कोई उत्तर नहीं दिया। राजा परीक्षित स्वयं का अपमान मानकर निकट मृत पड़े सर्प को क्रमिक मुनि के गले में डाल कर चले गए। अपने पिता के गले में मृत सर्प को देख मुनि के पुत्र ने श्राप दे दिया कि जिस किसी ने भी मेरे पिता के गले में मृत सर्प डाला है। उसकी मृत्यु सात दिनों के अंदर सांप के डसने से हो जाएगी। ऐसा ज्ञात होने पर राजा परीक्षित ने विद्वानों को अपने दरबार में बुलाया और उनसे राय मांगी। उस समय विद्वानों ने उन्हें सुखदेव का नाम सुझाया और इस प्रकार सुखदेव का आगमन हुआ। कथा के दौरान मुख्य यजमान परिक्षित सपरिवार उपस्थित रहे कथा पंडाल में भक्तों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है दूर दूर गांवों से लोग पैदल व अपने निजी वाहनों से कथा सुनने पधार रहे हैं आयोजक परिवार द्वारा बहुत ही सुंदर व्यवस्था की गई है

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