ब्रेकिंग
तमिलनाडु से मुरैना तक क्राइम का सफर: ₹19 लाख की चोरी की क्रेटा कार के साथ शातिर गिरफ्तार मुरैना सीएनजी टेस्ट क्या फेल हुआ, सिरफिरे ने पेट्रोल पंप पर गोलियां बरसा दीं एक आरोपी गिरफ्तार थाना अम्बाह: एक्सीडेंट में घायल युवक की इलाज के दौरान मौत थाना टेटरा: सर्पदंश से इलाज के दौरान महिला की दर्दनाक मौत भिंड में स्कूली बस और डंपर की टक्कर, सात बच्चे घायल मुरैना में राठी हॉस्पिटल पर हंगामा: इलाज के दौरान महिला की मौत पुलिस बल मौके पर खाकी की साठगांठ या लाचारी? डायल 112 के सामने से निकलते रहे रेत के ट्रैक्टर, एसपी की सख्ती पर 2 आरक्ष... उज्जैन में 11वीं की छात्रा की संदिग्ध मौत: लव जिहाद के आरोप पर हंगामा, सड़क पर शव रखकर चक्काजाम और अ... मुरैना मेडिकल स्टोरों पर औषधि प्रशासन की कार्रवाई तीन मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस निलंबित मुरैना कृष्ण टाउन कॉलोनी में तांडव: घर में घुसकर परिजनों से मारपीट और जान से मारने की खुली धमकी
मुख्य समाचार

जबलपुर हाई कोर्ट ने कहा-टीआई जांच रिपोर्ट दबाकर न बैठें, मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करें।

जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया की एकलपीठ ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि टीआई जांच रिपोर्ट दबाकर न बैठें, संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करें। पुलिस महानिदेशक को आदेशित किया जाता है कि वे इस सिलसिले में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करें।दरअसल, बालाघाट जिले के वारासिवनी निवासी लखीराम रामचंदानी सहित अन्य की ओर से दायर की गई याचिका में क्रिमिनल रिवीजन आवेदन की सुनवाई के बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा जारी आदेश को निरस्त किए जाने की राहत चाही गई थी। दायर याचिका में कही था ये बात याचिका में कहा गया था कि अनावेदक विनोद सचदेव की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने याचिका का निराकरण इस निर्देश के साथ कि था कि याचिकाकर्ता संबंधित थाना प्रभारी के समक्ष शिकायत पेश करें। थाना प्रभारी शिकायत की जांच कर विधि अनुसार कार्यवाही करेंगे। जांच में हुआ था ये खुलासा थाना प्रभारी ने जांच में पाया था कि कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता है। जिसके बाद याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने पाया था कि आदेशानुसार थाना प्रभारी ने प्रकरण की जांच की है। हाई कोर्ट ने अवमानना याचिका को निरस्त कर दिया। इसके बाद जेएमएफसी कोर्ट में आवेदन दायर किया गया था। जेएमएफसी कोर्ट ने आवेदन को निरस्त कर दिया। लिहाजा, एएसजे के समक्ष क्रिमिनल रिवीजन दायर की गई थी। एएसजे ने जेएमएफसी कोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए पुन: सुनवाई के आदेश जारी किए गए थे। ये आदेश जारी हुए है जेएमएफसी कोर्ट ने पुन: सुनवाई करते हुए जांच के आदेश जारी किए। सुनवाई के दौरान अनावेदक की ओर से तर्क दिया गया कि सभी याचिकाकर्ता सिंधी समाज कल्याण समिति के सदस्य थे। उन्होने दान में रुपये लेकर दुकानों का निर्माण किया और दान देने वालों पर दुकान आवंटित कर दी। दान लेने के लिए कोई बैंक खाता भी नहीं खोला था। उन्होंने पूज्य सिंधी समाज श्री गुरु नानक धर्मशाला के नाम की रसीद दी थी। समिति का रजिस्ट्रेशन निरस्त होने के कारण सीए ने भी अपनी ऑडिट रिपोर्ट को निरस्त कर दिया था। हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि थाना प्रभारी ने अपनी जांच रिपोर्ट संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत नहीं की थी। मजिस्ट्रेट संबंधित जांच रिपोर्ट का अवलोकन करते हुए धारा 156 (3) के आवेदन पर आदेश जारी कर देते। हाई कोर्ट ने पाया कि अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने सीआरपीसी में दिये प्रविधानों का उपयोग करते हुए उक्त आदेश जारी किए हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button