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मप्र हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे नर्सिंग कालेजों की जांच, अपात्र पाए गए संस्थानों पर लगेगा लंबा चौड़ा जुर्माना

जबलपुर। हाई कोर्ट ने प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग कालेज फजीवाड़ा प्रकरण में महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। इसके अंतर्गत हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली कमेटी उन नर्सिंग कालेजों की जांच करेगी, जिनमें कमियां पाई गई हैं। मामले की अगली सुनवाई 22 फरवरी को निर्धारित की गई है। प्रति फैकल्टी एक-एक लाख रुपये का जुर्माना हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी व न्यायमूर्ति एके पालीवाल की विशेष युगलपीठ ने कमेटी को उक्त दायित्व सौंपने के अलावा सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जिनमें साफ किया गया है कि अपात्र पाए गए नर्सिंग कालेजों को छोड़ा नहीं जाना चाहिए। तीन से अधिक फैकल्टी डुप्लिकेशन होने पर प्रति फैकल्टी एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाए। ला स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता विशाल बघेल की जनहित याचिका पर हाई कोर्ट ने विस्तृत आदेश पारित किया। हाई कोर्ट ने जो कमेटी गठित की है, उसके रिटायर्ड हाई कोर्ट जज चेयरमैन जस्टिस आरके श्रीवास्तव होंगे। इसके अलावा आईएएस राधेश्याम जुलानिया और इंदिरा गांधी नेशनल ट्रायबल विश्वविद्यालय अमरकंटक के कुलपति सदस्य होंगे। समिति के ये होंगे दायित्व सीबीआई जांच में कमियां पाये गये 74 कालेजों के संबंध में कार्रवाई करना। कमियों को सुधार के लिए कालेजों को समय देना और की गई कमी पूर्ति की पुष्टि करना। छात्रों को उपयुक्त पाये गये कालेजों में स्थानांतरित करने की योजना बनाना। कमी पूर्ति न करने वाले कालेजों को तत्काल बंद करने की अनुशंसा करना। कालेजों का निरीक्षण कर झूठी रिपोर्ट देने वाले इंस्पेक्टर्स के विरुद्ध कार्यवाही प्रस्तावित करना। नर्सिंग शिक्षा में सुधार हेतु नियमों, विनियमों एवं गुणवत्ता के संबंध में सुझाव देना।

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