ब्रेकिंग
मुरैना आबकारी विभाग की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल, अवैध शराब के कारोबार पर लगाम कसने में नाकाम महकम... मुरैना खाद्य विभाग की लापरवाही उजागर: जनता के स्वास्थ्य से हो रहा है खिलवाड़ मुरैना युवती को प्रेम जाल में फंसाया, दुष्कर्म किया, वीडियो बनाकर ब्लैकमेल भी तमिलनाडु से मुरैना तक क्राइम का सफर: ₹19 लाख की चोरी की क्रेटा कार के साथ शातिर गिरफ्तार मुरैना सीएनजी टेस्ट क्या फेल हुआ, सिरफिरे ने पेट्रोल पंप पर गोलियां बरसा दीं एक आरोपी गिरफ्तार थाना अम्बाह: एक्सीडेंट में घायल युवक की इलाज के दौरान मौत थाना टेटरा: सर्पदंश से इलाज के दौरान महिला की दर्दनाक मौत भिंड में स्कूली बस और डंपर की टक्कर, सात बच्चे घायल मुरैना में राठी हॉस्पिटल पर हंगामा: इलाज के दौरान महिला की मौत पुलिस बल मौके पर खाकी की साठगांठ या लाचारी? डायल 112 के सामने से निकलते रहे रेत के ट्रैक्टर, एसपी की सख्ती पर 2 आरक्ष...
धार्मिक

घर की इस दिशा में बनाएं स्वस्तिक चिन्ह, मां लक्ष्मी का होगा आगमन

इंदौर। सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य से पहले स्वस्तिक चिन्ह जरूर बनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि घर में सही दिशा और सही तरीके से बनाया गया स्वस्तिक चिन्ह काफी लाभकारी होता है। आइए, जानते हैं वास्तु शास्त्र के अनुसार, किस दिशा में और किस तरह स्वस्तिक बनाना चाहिए।

महत्वपूर्ण है स्वस्तिक चिन्ह

स्वस्तिक को ऋग्वेद में सूर्य का प्रतीक माना गया है। इसकी चार भुजाएं चार दिशाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं। स्वस्तिक को मंगल का प्रतीक भी माना जाता है। यह सौभाग्य को आकर्षित करता है। इसे बनाने से हमेशा घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है। स्वस्तिक चिन्ह बनाकर शुभ कार्य करने से वे सिद्ध हो जाते हैं।

इस दिशा में बनाएं स्वस्तिक

वास्तु शास्त्र के अनुसार, स्वस्तिक चिन्ह उत्तर-पूर्व या उत्तर दिशा ईशान कोण में बनाना शुभ माना जाता है। इसके स्थान पर आप अपने घर में अष्टधातु या तांबे से बना स्वस्तिक चिन्ह भी लगा सकते हैं। इससे व्यक्ति को आर्थिक लाभ की संभावनाएं भी बनती हैं और घर में समृद्धि आती है।

इस तरह बनाएं स्वस्तिक

चंदन, कुमकुम या हल्दी से स्वस्तिक बनाना शुभ माना जाता है। स्वस्तिक बनाते समय कभी भी पहले क्रॉस (X) या प्लस चिन्ह (+) नहीं बनाना चाहिए। ऐसा करने के लिए सबसे पहले स्वस्तिक का दायां भाग बनाएं और फिर बायां भाग बनाएं। यह भी ध्यान रखें कि भूलकर भी उल्टा स्वस्तिक नहीं बनाना चाहिए और न ही इसका प्रयोग करना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति को अशुभ परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

डिसक्लेमर

‘इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।’

Related Articles

Back to top button