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धार्मिक

सावन माह की संकष्टी चतुर्थी आज बेअसर रहेगा पंचक

 हिंदू धर्म में हर माह पौराणिक महत्व के कई त्योहार व व्रत रखे जाते हैं। जुलाई माह की बात की जाए तो इस माह संकष्टी चतुर्थी व्रत विशेष महत्व है। हिंदू पंचांग के मुताबिक हर माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी व्रत रखा जाता है। इस व्रत के दिन भगवान गणेश की पूरे विधि विधान से पूजा की जाती है।

सावन में Sankashti Chaturthi का महत्व अधिक

सावन में आने वाली संकष्टी चतुर्थी का महत्व अधिक होता है क्योंकि यह माह भोलेनाथ को समर्पित है और ऐसे में पूरे शिव परिवार का पूजन करना हितकारी होता है। भक्तों को भगवान भोलेनाथ व माता पार्वती के साथ-साथ भगवान गणेश की भी कृपा मिलती है।

संकष्टी चतुर्थी पूजा मुहूर्त

हिंदू पंचांग के मुताबिक 06 जुलाई को सावन गजानन संकष्टी चतुर्थी के दिन श्री गणेश की पूजा के लिए सुबह 05:26 से 10:40 तक का समय शुभ रहेगा। इस मुहूर्त में भगवान गणेश की पूजा करना शुभ होता है। रात के समय चंद्र पूजन में समय लग सकता है क्योंकि चंद्रोदय रात 10:12 पर होगा। पूजा के बाद संकष्टी चतुर्थी व्रत का पारण कर लें।

पंचक का नहीं होगा कोई महत्व

हिंदू पंचांग के मुताबिक गजानन संकष्टी चतुर्थी के दिन पंचक भी लगने वाला है। 6 जुलाई को दोपहर 1.38 मिनट से पंचक शुरू होगी और 10 जुलाई को शाम 6.59 मिनट पर पंचक समाप्त होगा। पौराणिक मान्यता के मुताबिक भगवान गणेश को बुद्धि का दाता कहा गया है और इस दौरान पूजा के दौरान यदि पंचक होता है तो इसका कोई महत्व नहीं होता है।

संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि

– सूर्योदय से पहले स्नान करें और साफ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें।

– ईशान कोण में एक चौकी पर लाल या पीले रंग के कपड़े पर गणेश प्रतिमा रखें।

– भगवान गणेश को जल, दूर्वा, अक्षत, पान जरूर चढ़ाएं।

– फिर “गं गणपतये नमः:” मंत्र का जाप करें।

– भगवान गणेश को मोतीचूर के लड्डू या बूंदी का भोग लगाएं।

– गणेश जी की पूजा करने के बाद रात में चंद्र देव का भी पूजन करें।

– दूध, चंदन और शहद से चंद्रदेव को अर्घ्य दें और व्रत का पारण करें।

डिसक्लेमर

‘इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।’

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