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मध्यप्रदेश

18 जिलों के 46 नगरीय निकायों में प्रचार थमा

भोपाल । मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव में एक साल का समय बचा है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही चुनाव की तैयारी में जुट गए है। इसके पहले 18 जिलों में 46 नगरीय निकाय में निर्वाचन हो रहे हैं। यह स्थानीय चुनाव अगले साल होने वाले विधानसभ चुनाव से पहले अहम है। इसलिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ समेत दोनों पार्टी के बड़े नेताओं न भी प्रचार के अंतिम दिन अपनी पूरी ताकत झोंक दी। इन 46 नगरीय निकायों में रविवार को प्रचार थम गया। 27 सितंबर को मतदान होगा। इन नगरीय निकाय में आदिवासी बाहुल क्षेत्र की नगर पालिका और नगर परिषद ज्यादा है। ऐसे में साफ है कि स्थानीय निकाय चुनाव के परिणाम का असर आगामी विधानसभा चुनाव पर भी पड़ेगा। यहीं कारण है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लगातार अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों के बीच पहुंचे ।प्रदेश के 2018 में  कांग्रेस ने अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित 47 में से 31 पर जीत दर्ज की थी। आदिवासी वोटर के कांग्रेस की तरफ जाने से भाजपा की सत्ता चली गई थी। यही कारण है कि अब दोनों ही पार्टियों ने आदिवासी वोटरों को साधने में जुट गई है। बीजेपी अब पिछली बार की तरह कोई गलती नहीं दोहराना चाहती है। प्रदेश की 16 नगर निगम में भाजपा का कब्जा था। लेकिन भाजपा को 7 में हार का सामना करना पड़ा। इसमें पांच पर कांग्रेस, कटनी में निर्दलीय और सिंगरौली में आम आदमी पार्टी ने जीत दर्ज की। इसका बीजेपी के लिए नेगिटिव संदेश गया। यही कारण है कि बीजेपी ज्यादा से ज्यादा नगर पालिका और नगर परिषद जीतने में जुटी हुई है।  भाजपा प्रदेश प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने कहा कि पार्टी किसी चुनाव को छोटा या बड़ा मानकर नहीं लड़ती है। निगम परिषद से लेकर लोकसभा चुनाव तक सभी की तैयारी एक समान करती है। इसके पहले नगर पालिका और नगर परिषद के चुनाव में 87 प्रतिशत जगह भाजपा ने जीत दर्ज की। हालांकि नगर निगम में कुछ जगह पर महापौर पद के लिए भाजपा को आशा के अनुरूप परिणाम नहीं मिले। फिर भी 16 नगर निगमों में छिंदवाड़ा और मुरैना को छोड़ दे तो सिंगरौली, कटनी, ग्वालियर समेत सभी जगह सबसे ज्यादा भाजपा के पार्षदों ने जीत दर्ज की है। जनता सरकार की जनहित की नीतियों पर वोट करेंगे।कांग्रेस प्रवक्ता आनंद जाट ने कहा कि चुनाव का जिम्मा विधायक, पूर्व विधायकों और जिला संगठन को सौंपा है। प्रदेश में नेमावर, सिवनी, खरगोन, नीमच, विदिशा में आदिवासियों पर अत्याचार हो रहे है, वो भाजपा की आदिवासी विरोधी सोच को उजागर करता है। वहीं, आदिवासी समाज कमलनाथ जी में अपना अभिभवाक और संरक्षण देखता है। आदिवासी हमारे लिए वोट बैंक नहीं परिवार का हिस्सा है। जनता महंगाई, बेरोजगारी और महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों और भाजपा के भ्रष्टाचार से त्रस्त है। इस चुनाव के परिणाम भी कांग्रेस के पक्ष में आएंगे।

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