ब्रेकिंग
तमिलनाडु से मुरैना तक क्राइम का सफर: ₹19 लाख की चोरी की क्रेटा कार के साथ शातिर गिरफ्तार मुरैना सीएनजी टेस्ट क्या फेल हुआ, सिरफिरे ने पेट्रोल पंप पर गोलियां बरसा दीं एक आरोपी गिरफ्तार थाना अम्बाह: एक्सीडेंट में घायल युवक की इलाज के दौरान मौत थाना टेटरा: सर्पदंश से इलाज के दौरान महिला की दर्दनाक मौत भिंड में स्कूली बस और डंपर की टक्कर, सात बच्चे घायल मुरैना में राठी हॉस्पिटल पर हंगामा: इलाज के दौरान महिला की मौत पुलिस बल मौके पर खाकी की साठगांठ या लाचारी? डायल 112 के सामने से निकलते रहे रेत के ट्रैक्टर, एसपी की सख्ती पर 2 आरक्ष... उज्जैन में 11वीं की छात्रा की संदिग्ध मौत: लव जिहाद के आरोप पर हंगामा, सड़क पर शव रखकर चक्काजाम और अ... मुरैना मेडिकल स्टोरों पर औषधि प्रशासन की कार्रवाई तीन मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस निलंबित मुरैना कृष्ण टाउन कॉलोनी में तांडव: घर में घुसकर परिजनों से मारपीट और जान से मारने की खुली धमकी
छत्तीसगढ़

छत्‍तीसगढ़ में शुरू हुई मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ी पर्व सम्मान निधि योजना, ग्राम पंचायतों को मिलेंगे इतने रुपये

रायपुर ।   मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य के गैर-अनुसूचित क्षेत्रों के लिए ‘मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ी पर्व सम्मान निधि योजना’ की शुरुआत की। मुख्यमंत्री ने पहली किश्त के रूप में आज योजना के अंतर्गत आने वाली सभी 6 हजार 111 ग्राम पंचायतों को 5-5 हजार रुपए के मान से कुल 3 करोड़ 5 लाख 55 हजार रुपए की राशि जारी की। मुख्यमंत्री बघेल ने इसके साथ-साथ मुख्यमंत्री आदिवासी परव सम्मान निधि के अंतर्गत अनुसूचित क्षेत्र के 14 जिलों की 3 हजार 793 ग्राम पंचायतों को आज 5-5 हजार रुपए के मान से कुल 1 करोड़ 89 लाख 65 हजार रुपए की राशि जारी की। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री बघेल ने 13 अप्रैल को बस्तर में आयोजित भरोसा सम्मेलन में ‘मुख्यमंत्री आदिवासी परब सम्मान निधि योजना’ का शुभारंभ करते हुए बस्तर संभाग की 1840 ग्राम पंचायतों को योजना की पहली किश्त के रूप में 5-5 हजार रुपए के मान से अनुदान राशि जारी की थी।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि छत्तीसगढ़ के विकास में यहां की संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का काम अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्य में तीजा, हरेली, भक्तिन महतारी कर्मा जयंती, मां शाकंभरी जयंती (छेरछेरा), छठ और विश्व आदिवासी दिवस जैसे पर्वो पर सार्वजनिक अवकाश दिया जा रहा है। राज्य शासन की यह भावना है कि तीज-त्यौहारों के माध्यम से नयी पीढ़ी अपने पारंपरिक मूल्यों से संस्कारित हो और अपनी संस्कृति पर गौरव का अनुभव करे। राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव, युवा महोत्सव, छत्तीसगढ़िया ओलंपिक, बासी – तिहार जैसे आयोजनों के पीछे भी हमारा यही उद्देश्य है। लोक-संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से ही देवगुड़ियां और घोटुलों के विकास का काम भी किया जा रहा है।

Related Articles

Back to top button