ब्रेकिंग
तमिलनाडु से मुरैना तक क्राइम का सफर: ₹19 लाख की चोरी की क्रेटा कार के साथ शातिर गिरफ्तार मुरैना सीएनजी टेस्ट क्या फेल हुआ, सिरफिरे ने पेट्रोल पंप पर गोलियां बरसा दीं एक आरोपी गिरफ्तार थाना अम्बाह: एक्सीडेंट में घायल युवक की इलाज के दौरान मौत थाना टेटरा: सर्पदंश से इलाज के दौरान महिला की दर्दनाक मौत भिंड में स्कूली बस और डंपर की टक्कर, सात बच्चे घायल मुरैना में राठी हॉस्पिटल पर हंगामा: इलाज के दौरान महिला की मौत पुलिस बल मौके पर खाकी की साठगांठ या लाचारी? डायल 112 के सामने से निकलते रहे रेत के ट्रैक्टर, एसपी की सख्ती पर 2 आरक्ष... उज्जैन में 11वीं की छात्रा की संदिग्ध मौत: लव जिहाद के आरोप पर हंगामा, सड़क पर शव रखकर चक्काजाम और अ... मुरैना मेडिकल स्टोरों पर औषधि प्रशासन की कार्रवाई तीन मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस निलंबित मुरैना कृष्ण टाउन कॉलोनी में तांडव: घर में घुसकर परिजनों से मारपीट और जान से मारने की खुली धमकी
मध्यप्रदेश

 तीन चीतों को खुले जंगल में छोडने की तैयारी

इनमें दो मादा और एक नर चीता होगा

भोपाल । वन्य प्राणी मुख्यालय जल्दी ही तीन चीतों को कूनो राष्ट्रीय उद्यान के खुले जंगल में छोड़ने की तैयारी कर रहा है। इन चीतों में दो मादा और एक नर चीता शामिल है। ये उन आठ चीतों में से हैं, जिन्हें नामीबिया से लाकर 17 सितंबर, 2022 को कूनो में छोड़ा गया था। नामीबिया के चीता विशेषज्ञ पहले से ही कह रहे थे कि चीते पूरी तरह स्वस्थ हैं और जंगल में छोड़े जा सकते हैं लेकिन जनवरी में मादा चीता सासा के बीमार होने के बाद वन अधिकारी आश्वस्त नहीं हो पा रहे थे। दक्षिण अफ्रीका से 18 फरवरी को लाए गए 12 चीते तो अभी क्वारंटाइन बाड़े में ही हैं। खुले जंगल में भी चीतों को पर्यटकों से दूर रखा जाएगा। जिस क्षेत्र में चीते होंगे, वहां पर्यटक नहीं जा सकेंगे। दक्षिण अफ्रीका के विशेषज्ञों से दूसरा परामर्श लिया गया। उनकी सहमति के बाद तीन चीतों को खुले जंगल में छोड़ने का निर्णय लिया गया है। हालांकि पर्यटकों को चीता देखने के लिए अभी इंतजार करना होगा।  सबसे पहले नामीबिया से तीन नर एवं पांच मादा चीता लाए गए थे। इनमें से तीन चीते ऐसे हैं, जो जन्म के बाद से ही कैप्टिविटी (कैद) में रहे हैं। उन्हें खुले जंगल में नहीं छोड़ा जा सकता। खुले जंगल के अभ्यस्त चीतों को ही छोड़ा जा सकता है। चीतों की निगरानी के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं। एंटीना लगे वाहन के साथ टीम प्रत्येक चीते से सौ मीटर के दायरे में रहेगी। चीते के गले में पहनाई गई रेडियो कालर से सिग्नल मिलते रहेंगे। यदि चीता देर तक बैठता है या उसके शरीर में कुछ समय तक हलचल नहीं होती है, तो टीम नजदीक जाकर देखेगी। यही तरीका पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की पुनर्स्थापना कार्यक्रम में निगरानी के लिए अपनाया गया था। कालर से जीपीएस ट्रैकिंग की भी व्यवस्था होगी।

Related Articles

Back to top button