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मध्यप्रदेश

भारतीय संस्कृति इतनी भायी, ची चाउ पाइ बन गईं सीता देवी

इंदौर ।    चीन की ची चाउ पाइ को भारतीय संस्कृति और अध्यात्म इतना पसंद आया कि उन्होंने अपना नाम ही बदल लिया। रख लिया- सीता देवी। अब वह किसी को अपना नाम यही बताती हैं और भारतीय महिलाओं की परंपरागत परिधान साड़ी पहनना ज्यादा पसंद करती हैं। इन दिनों सिंगापुर में रह रहीं ची चाउ पाइ उर्फ सीता देवी भारतीय प्रवासी सम्मेलन में इंदौर आई हुई हैं। भारतीय संस्कृति के प्रति आकर्षण उनको यहां खींच लाया है। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति में विश्व बंधुत्व और सबके कल्याण का भाव है। सनातन धर्म की परंपराएं ईश्वर तक पहुंचने का सबसे सशक्त माध्यम हैं, जो अध्यात्म से आत्मिक भाव से जोड़ती हैं। वेद, पुराण, गीता और रामायण जैसे ग्रंथों में जीवन का सार हैं, इसलिए उनका झुकाव सनातन धर्म के प्रति हो गया और उन्होंने इसे अपना लिया है। ची चाउ पाइ उर्फ सीता देवी ने बताया कि उनका जन्म चीन में हुआ था और वह सिंगापुर में रह रही हैं। लगभग चार वर्ष पहले उन्होंने अपना नाम सीता देवी रख लिया था, क्योंकि भगवान राम और सीता ने जिन आदर्शों को जिया, वे दूसरों को भी जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं। उनको लगता है कि धर्मपत्नी के रूप में मर्यादा पुरुषोत्तम राम के सबसे करीब थीं, इसलिए उन्होंने अपना नाम सीता देवी रखना पसंद किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से दुनिया भर में भारतीयता और सनातन धर्म का गौरव बढ़ रहा है।

पूर्वजों की धरती पर ही पढ़ना चाहते हैं दुबई में रह रहे प्रवासी छात्र

भले ही भारतीय नौजवान शिक्षा के लिए सात समंदर पार जाना पसंद करते हों, लेकिन दुबई में रह रहे भारतीय प्रवासी बच्चे अपने पूर्वजों की धरती पर आकर शिक्षा ग्रहण करना चाहते हैं। यहां नौकरी भी करना चाहते हैं। ऐसी मंशा उन्होंने यहां प्रवासी भारतीय सम्मेलन में आकर व्यक्त की। सम्मेलन में दुबई से 143 छात्रों का दल इंदौर आया हुआ है। इस दल में कक्षा नौ से 12 वीं तक के छात्र शामिल हैं। इंदौर आकर बेहद खुश और उत्साहित नजर आ रहे ये छात्र एयरपोर्ट पर माथे पर तिलक लगाकर और फूल-मालाओं से किए गए अपने स्वागत से अभिभूत हो गए। वे छप्पन दुकान गए और व्यंजनों का स्वाद छका। इन दल में शामिल छात्रों ने बताया कि भारत में उच्च शिक्षा के लिए बेहतर शैक्षणिक संस्थान हैं, इसलिए वह अपने कॉलेज की पढ़ाई भारत में करना चाहते हैं, ताकि अपने पूर्वजों की धरती पर रह सकें। इनमें से कई छात्रों के स्वजन भी भारत में हैं, इसलिए भी वे चाहते हैं कि अपनों के बीच ही रहें। उन्होंने पढ़ाई के बाद मौका मिलने पर भारत में ही रहकर नौकरी करने की इच्छा भी जताई। कहा कि विश्व स्तर पर भारत की छवि तेजी से बदली है। ये छात्र इंदौर का इतिहास जानने के लिए पर्यटन स्थल भी देखने जाएंगे।

स्वच्छता देख प्रभावित हुए नाइजीरिया के प्रतिनिधि

नाइजीरिया से सुले याकूब अब्बाजी और अब्दुल याकू अब्बासी वहां की सरकार के प्रतिनिधि के रूप में भारतीय प्रवासी सम्मेलन में शामिल होने आए हैं। वे इंदौर की सफाई से काफी प्रभावित हुए। उनका कहना है कि भारत के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर की स्वच्छता के बारे में जो सुना था, उससे काफी बेहतर स्वच्छता का माहौल यहां पाया है।

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