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मध्यप्रदेश

लंबे समय से जारी है फिल्मों के जरिए बड़े वर्ग की भावनाएं आहत करने का काम

भोपाल ।  लेखक और गीतकार मनोज मुंतशिर का कहना है कि फिल्मों के माध्यम से देवी- देवताओं का मजाक उड़ाने और एक बड़े वर्ग की भावनाओं को आहत करने का काम लंबे समय से किया जा रहा है। पहले अपने धर्म, संस्कृति और परंपराओं को लेकर जागरूकता का अभाव था, इसके कारण मुखर विरोध नहीं हुआ। अब देश बदल रहा है। नवजागरण आया है, जिसके कारण ऐसे दुष्प्रयासों का विरोध किया जा रहा है, जो सही भी है। फिल्म बनाते समय सावधानी बरतना निर्माता की नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने खुद के ब्राह्मणवादी होने के आरोप को भी सिरे से नाकारा। महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ, स्वराज संस्थान संचालनालय एवं सैम ग्लोबल विश्वविद्यालय द्वारा रवींद्र भवन में आयोजित भारतीय ज्ञान परंपरा का वैश्विक योगदान विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में हिस्सा लेने भोपाल आए मशहूर गीतकार ने एक होटल में मीडिया से चर्चा में यह बात कही। हालिया रिलीज फिल्म ‘पठान’ को लेकर उनका कहना था कि विरोध तो होना ही था। फिल्म निर्माताओं को ऐसा नहीं करना चाहिए। दीपिका पादुकोण के वस्त्र में भगवा रंग को उभारे बिना भी काम हो सकता था। इससे फिल्म में कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इसको हटाया भी जा सकता था। फिल्म इंडस्ट्री में बड़े-बड़े कास्ट्यूम डिजाइनर हैं, जो कुछ दूसरा कास्ट्यूम भी डिजाइन कर सकते थे। उन्होंने कहा कि हमें राधा-कृष्ण के प्रेम सेलिब्रेट करना चाहिए, जोधा-अकबर को नहीं।

सनातन परंपरा में जातिवाद है ही नहीं

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मैं राष्ट्रवादी और हिंदूवादी तो हूं लेकिन मुझे ब्राह्मणवादी कहना सही नहीं होगा। एक हिंदू कभी जातिवादी नहीं हो सकता है। हिंदू धर्म में जातिवाद की कोई जगह ही नहीं है। सनातन धर्म में किसी को छोटा या बड़ा मानने और बांटने का कोई सिद्धांत ही नहीं है। इसमें वासुधैव कुटुम्बम की बात कही गई है। हम पूरी दुनिया को अपना मानते हैं। मेरी नसों में एक ब्राह्मण के साथ ही एक क्षत्रिय का खून भी है। मेरे पिता ब्राह्मण और माता क्षत्राणी थीं। मैं गर्व से कहता हूं कि मैं बाह्मण हूं और क्षत्रिय भी, ऐसे मैं ब्राह्मणवादी कैसे हो सकता हूं। ठीक इसी प्रकार कोई भी जननायक किसी एक धर्म या जाति का नहीं होता है। वह सभी का होता है।

फिल्मों में बढ़े राजनीतिक हस्तक्षेप

उन्होंने कहा कि मैं किसी ऐसी फिल्म में काम नहीं करता जिसके माध्यम से सनातन परंपराओं का विरोध होता हो। इससे मेरा प्रति वर्ष करीब पांच करोड़ का नुकसान होता है, लेकिन मैं भारत का भक्त हूं और हमेशा असलियत ही बताता हूं। बायकाट का दंश झेल चुकी उनकी आगामी फिल्म आदिपुरुष को लेकर मनोज मुंतशिर ने कहा कि सिर्फ पांच मिनट का वीडियो देखकर तीन घंटे की पूरी फिल्म के बारे में कोई धारणा बना लेना सही नहीं है। मेरी फिल्म देखकर दर्शक आनंदित होकर जय श्रीराम का नारा लगाते हुए उठेंगे।

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