ब्रेकिंग
खाकी की साठगांठ या लाचारी? डायल 112 के सामने से निकलते रहे रेत के ट्रैक्टर, एसपी की सख्ती पर 2 आरक्ष... उज्जैन में 11वीं की छात्रा की संदिग्ध मौत: लव जिहाद के आरोप पर हंगामा, सड़क पर शव रखकर चक्काजाम और अ... मुरैना मेडिकल स्टोरों पर औषधि प्रशासन की कार्रवाई तीन मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस निलंबित मुरैना कृष्ण टाउन कॉलोनी में तांडव: घर में घुसकर परिजनों से मारपीट और जान से मारने की खुली धमकी आरक्षण, गरीबी और उपेक्षा: हाशिए पर खड़ा सवर्ण समाज कब तक सहेगा चुप्पी का दर्द : महिपाल मकवाना ग्वालियर यूनिवर्सिटी थाना क्षेत्र में तेज रफ्तार कार ने ढाया कहर, ऑटो मे मारी टक्कर ऑटो पलटने से तीन... भोपाल एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन जारी, भोपाल अवैध शराब के खिलाफ पूरे प्रदेश में विशेष अभियान लापरवाही पर अफसरों की होगी जवाबदेही तय मुरैना: एसपी धर्मराज मीना की मानवीय पहल, बीमार मां के इलाज के लिए दिए ₹1 लाख सरकारी योजनाओं पर लग रहा पलीता: धरातल पर दम तोड़ रही जनहितैषी नीतियां
देश

ऑनर किलिंग पर सीजेआई ने कहा-प्रेम के चलते हर साल मार दिए जाते हैं सैकड़ों युवा

मुंबई । देश में ऑनर किलिंग को लेकर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डी वाई चंद्रचूड़ ने बड़ा बयान दिया है। मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि देश में हर साल प्रेम प्रंसग के चलते या दूसरी जाति में शादी करने की वजह से मार दिए जाते हैं क्योंकि वे परिवार के खिलाफ जाकर शादी करते हैं। कार्यक्रम में उन्होंने ऐसे युवाओं के खिलाफ शोक भी व्यक्त किया।

जस्टिस चंद्रचूड़ पूर्व अटॉर्नी जनरल के 90वीं जयंती पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। भाषण के दौरान उन्होंने कहा कि नैतिकता एक ऐसी अवधारणा है जो हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग होती है।
1991 के एक आर्टिकिल का जिक्र किया

कार्यक्रम के दौरान सीजेआई ने 1991 के एक आर्टिकिल का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कैसे 1991 में उत्तर प्रदेश में एक 15 साल की लड़की को उसके माता-पिता ने मार डाला था। ग्रामीणों ने उस अपराध को स्वीकार कर लिया क्योंकि ग्रामीणों के मुताबिक लड़की ने समाज के खिलाफ जाकर कदम उठाए थे। वह समाज जिसे पावरफुल लोगों ने बनाया है और जिनका कमजोर तबके के लोगों को पालन करना पड़ता है। जबकि ये नियम उस तबके के लोगों के परंपराओं के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि दंबग लोग जो तय करते हैं उसे ही नैतिकता मानी जाती है। कमजोर तबकों को इतना दबाया जाता है कि वे खुद के नियम नहीं बना पाते हैं।

Related Articles

Back to top button