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मध्यप्रदेश

बारिश ना होने से फसलों पर पड़ रहा असर, तापमान बढ़ने पौधे पड़ रहे पीले, किसान परेशान

अनूपपुर। जिले में पिछले एक पखवाड़ा से बारिश न होने के कारण तापमान बढ़ते जा रहा है और इसका असर खरीफ सीजन की फसलों पर पड़ रहा है। जिले में इस सीजन ली जाने वाली मुख्य फसल धान की खेती बारिश के आभाव में प्रभावित हो रही है, तापमान बढ़ते जाने के कारण और बारिश न मिलने से पौधे बढ़ नहीं पा रहे हैं और पीले होते जा रहे हैं। धान के पौधों में कीट व्याधि का प्रकोप भी बढ़ रहा है। किसान धान की फसल को वर्षा का पानी न मिलने से चिंतित हैं और फसल पर संकट गहरा गया है।

जिले में पिछले 15 दिनों से तेज झमाझम बारिश नहीं हुई है। कुछ इलाकों में कुछ देर खंड बारिश ही हो सकी है, जो धान की फसल के लिए पर्याप्त नहीं रही। इस साल शुरू से मौसम फसल के लिए अनुकूल नहीं रहा है। इन दिनों बढ़ा तापमान फसल को नुकसान पहुंचा रहा है, खेत में दरार आने लगी है। अधिक तापमान होने से कीटनाशक भी बेअसर हो रही हैं, जिसके चलते पौधों को कीड़े चट कर रहे हैं।

बताया गया मानसून के सीजन का तीन चौथाई समय पूरा हो चुका है और अब इसकी वापसी का समय नजदीक है। इस वर्ष मौसम में उलट फेर के चलते बारिश औसत से भी काफी कम हुई। अगस्त के पहले पखवाड़े के बाद लंबे समय से बारिश न होने से धान की खेती पर संकट खड़ा हो गया है। रोपाई के बाद किसानों को अच्छी बारिश का इंतजार था, लेकिन ऐसा ना हुआ, बल्कि अब दिनों दिन गर्मी बढ़ रही है।

पौधों में लग रहा कीड़ा

किसानों ने बताया कि पौधे के अंदर कीड़ा लग रहा है, जो पौधों को अंदर से कुतर रहा है। इसके बाद पौधा पीला हो जाता है और दो-तीन दिन में पूरा पौधा खराब हो जाता है। यह समस्या धीरे-धीरे क्षेत्र में बढ़ रही है। इसी तरह खेतों में चूहा भी पौधों को काट रहे हैं। कीटनाशक दवा का छिड़काव करके इस बीमारी से फसल को बचाने का जतन किसान कर रहे हैं। अनूपपुर के पिपरिया गांव सहित आसपास गांव में यह रोग बना हुआ है।

माहू लगने से खराब होगी फसल

किसानों को कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो माहू लगने की संभावना बढ़ जाएगी। माहू लगा तो धान की फसल नष्ट हो जाएगी, इसलिए बारिश बेहद जरूरी है। जिले में इस साल 98 हजार हेक्टेयर पर धान की फसल किसानों के द्वारा ली गई हैं। खेतों में पानी की कमी की वजह से धान के पौधे पनप नहीं पा रहे हैं।

पिछले साल की तुलना में कम बारिश

जिले में 1 जून से 3 सितंबर तक 6625 मिली मीटर बारिश हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक 7862 मिली मीटर बारिश हो चुकी थी। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष कम बारिश के कारण धान की फसल प्रभावित हो रही है।

सरकार ने की अघोषित कटौती

किसान रमेश पटेल ने कहा कि एक तरफ किसान ईश्वर की मार झेल रहा है। लगभग 15 दिन से अधिक समय हो गए बारिश नहीं हुई। किसानों ने फसलों को पानी देने की सोची, तो दूसरी तरफ सरकार ने अघोषित बिजली कटौती करनी शुरू कर दी। बताया गया अल्प बारिश और अति बारिश के कारण समय पर किसान रोपाई व सियासी का काम समय पर नहीं कर पाए, जिससे खेतों में खरपतवार का असर भी अब दिखाई देने लग गया है। जिससे किसान और चिंतित हो उठे हैं।

मिट्टी हो रही सख्त

खेतों में पानी की कमी की वजह से धान की हरियाली प्रभावित होने लगी है। कई स्थानों पर पौधे पनप भी नहीं पाए हैं। देर से हुई बारिश के कारण मिट्टी के सख्त होने का असर अब दिखने लगा है। बताया गया समय पर खरपतवार को ना निकला, तो उपज पर असर पड़ेगा। सिंचाई का साधन न होने से खेतों का जलस्तर कम होने लगा है। किसानों ने कहा कि एक सप्ताह के अंदर बारिश न हुई, तो खरीफ में सूखे की स्थिति बन सकती है। बताया कि बारिश की बिगड़ी तासीर दलहन, तिलहन के साथ ही सब्जी की खेती को भी प्रभावित कर रही है।

धान की फसल पर आ जाएगा संकट

कृषि विभाग के उपसंचालक एनडी गुप्ता ने भी कहा कि धान की फसल को पानी की बेहद जरूरत है, जो न मिलने से पौधों को नुकसान पहुंच रहा है। अगर जल्द बारिश न हुई तो धान की फसल पर संकट आ जाएगा।

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