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 कोविड-19 पैरोल पर रिहा हुए सभी कैदी 15 दिनों के भीतर करें सरेंडर: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली । सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि कोविड महामारी के दौरान उसके आदेश पर गठित राज्य उच्चाधिकार प्राप्त समितियों द्वारा आपातकालीन पैरोल पर रिहा किए गए सभी कैदियों को 15 दिनों के भीतर आत्मसमर्पण करना होगा। जस्टिस एमआर शाह और सीटी रविकुमार की पीठ ने कहा कि 23 मार्च 2020, 7 मई 2021 और 16 जुलाई 2021 के आदेशों के अनुपालन में उच्चाधिकार समिति की सिफारिश के अनुसार आपातकालीन पैरोल/अंतरिम जमानत पर रिहा किए गए सभी अंडर-ट्रायल/दोषियों को इस अदालत द्वारा स्वत: संज्ञान लेकर पारित रिट याचिका में 15 दिनों के भीतर संबंधित जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा।
खंडपीठ ने कहा कि वर्तमान आदेश जेल अधिकारियों द्वारा संबंधित अभियुक्तों/कैदियों को सूचित किया जाए कि उन्हें अब 15 दिनों की अवधि के भीतर आत्मसमर्पण करना होगा। हालांकि, उसके बाद संबंधित कैदियों द्वारा संबंधित जेल अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करने के बाद संबंधित विचाराधीन कैदी अदालत के समक्ष जमानत के लिए प्रार्थना कर सकते हैं और उनके आवेदनों पर कानून के अनुसार और योग्यता के आधार पर विचार किया जाएगा। अपनी अपीलों में संबंधित न्यायालय के समक्ष सजा के निलंबन के लिए प्रार्थना करें जो कि लंबित हो सकती है, और जिस पर कानून और/या गुण-दोष के अनुसार विचार किया जा सकता है। पीठ ने कहा कि यह विवाद में नहीं है और इस पर विवाद नहीं किया जा सकता है कि उन सभी विचाराधीन कैदियों/दोषियों को जेलों में भीड़भाड़ को ध्यान में रखते हुए और भीड़भाड़ वाली जेलों में कैदियों के बीच कोविड-19 वायरस के प्रसार को रोकने के लिए अंतरिम जमानत/आपातकालीन पैरोल पर रिहा किया गया था।
कोर्ट ने संज्ञान में और सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों, गृह सचिवों, डीजी (कारागार) और समाज कल्याण सचिवों को नोटिस जारी किया। महामारी की पहली और दूसरी लहर के दौरान शीर्ष अदालत ने जेलों में भीड़भाड़ से बचने के लिए कैदियों को आपातकालीन पैरोल देने के लिए कई आदेश पारित किए थे, ताकि उनके बीच वायरल संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।

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