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चंडीगढ़ में 15, पंजाब में 28 और हरियाणा में 33 नवजात सालभर में तोड़ देते हैं दम

चंडीगढ़: 15 अक्टूबर को ‘प्रेग्नेंसी एंड इनफेंट लॉस रिमेंबरेंस डे’ मनाया जाता है। यानी इस दिन उन बच्चों को याद किया जाता है, जो गर्भ में, प्रसव के दौरान व बाद में किसी न किसी कारणों से दुनिया छोड़ चुके हैं।मां और परिवार के लिए एक नवजात शिशु को खोना बहुत ही दुखद और दर्दनीय होता है। 15 अक्टूबर को ‘प्रेग्नेंसी एंड इनफेंट लॉस रिमेंबरेंस डे’ मनाया जाता है। यानी इस दिन उन बच्चों को याद किया जाता है, जो गर्भ में, प्रसव के दौरान व बाद में किसी न किसी कारणों से दुनिया छोड़ चुके हैं।इनफेंट मॉरटैलिटी की बात करें तो नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 (2019-21) के आंकड़ों के अनुसार गर्भ के दौरान सही पोषण और प्रसव उपरांत उचित चिकित्सकीय देखभाल न मिलने से प्रति हजार नवजात शिशुओं में से पंजाब में 28, हरियाणा में 33 और चंडीगढ़ में 15 शिशुओं की मौत एक वर्ष के भीतर हो जाती है। देश में यह दर 35.2 है।जन्म के 28 दिन के भीतर होने वाली शिशु मृत्यु दर में भी स्थिति चिंताजनकचंडीगढ़ में नियोनेटल मॉरटैलिटी रेट 5 साल में 30 से घटकर 1.6 हुईनेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 (2015-16) के अनुसार चंडीगढ़ में नियोनेटल मॉरटैलिटी रेट (जन्म के 4 सप्ताह या 28 दिन में नवजात मृत्युु दर) प्रति हजार पर 30.3 था, जो घटकर 1.6 हो चुकी है। वहीं, पंजाब में पांच साल पहले नियोनेटल मॉरटैलिटी रेट 21.2 थी, जो बढ़कर 21.8 हो गई है। हरियाणा में नियोनेटल मॉरटैलिटी रेट 22.1 से घटकर 21.6 हो चुकी है। देश में यह दर 29.5 से घटकर 24.9 हो चुकी है।20 साल पहले अमेरिका और कनाडा में हुई शुरुआत‘प्रेग्नेंसी एंड इनफेंट लॉस रिमेंबरेंस डे’ की स्थापना 15 अक्टूबर 2002 में संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा में की गई थी। डब्लूयएचओ की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में समय से पहले प्रसव, संक्रमण, जन्म के समय खून में ऑक्सीजन की कमी (बर्थ एस्फिक्सिया) एवं जटिल प्रसव के दौरान उपचार की देरी शिशु मृत्युदर की बढ़ी वजह है।

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