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मध्यप्रदेश

अस्पताल प्रबंधन ने दो डॉक्टरों के रोके थे लाखाें रुपये, अब ब्याज सहित लौटाने के आदेश

इंदौर। इंदौर जिला न्यायालय ने विजय नगर क्षेत्र स्थित बाम्बे अस्पताल प्रबंधन को आदेश दिया है कि वह दो अलग-अलग फैसलों में अस्पताल में पूर्व में काम कर रहे दो विशेषज्ञ डाक्टरों के रोके गए लाखों रुपये ब्याज सहित उन्हें दें। अस्पताल प्रबंधन न्यायालय में पैसे रोके जाने के पीछे कोई संतोषजनक कारण नहीं बता सका था।

कोर्ट ने माना कि प्रबंधन ने बगैर किसी पर्याप्त कारण के डाक्टरों के पैसे रोके थे। न्यायालय के आदेश के बाद डाक्टरों को उनका रोका गया पैसा मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

शर्तों के अनुसार नहीं किया था भुगतान

अस्पताल में पूर्व में कार्यरत दो विशेषज्ञ चिकित्सकों को अनुबंध समाप्त होने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने तय शर्तों के अनुसार भुगतान नहीं किया था। इस पर दोनों डाक्टरों ने एडवोकेट अमित दुबे और एडवोकेट अभिजीत दुबे के माध्यम से इंदौर जिला न्यायालय में वसूली के लिए प्रकरण प्रस्तुत किया था।

10 वर्ष से अधिक चले मुकदमे

अस्पताल में पदस्थ इन दो डाक्टरों में से एक गेस्ट्रोएंट्रोलोजिस्ट हैं। अनुबंध की शर्तों के अनुसार इन्हें अस्पताल प्रबंधन से लगभग साढ़े सत्रह लाख रुपये लेना थे। इसी तरह दूसरे डाक्टर ओंकोलोजिस्ट सर्जन हैं और इन्हें भी अस्पताल से साढ़े 12 लाख रुपये लेना थे। डाक्टरों ने लगभग 10 वर्ष पहले जिला न्यायालय की शरण ली थी। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिर डाक्टरों को सफलता मिली।

अपर जिला न्यायाधीश धर्मेंद्र सोनी ने यह मानते हुए कि दोनों डाक्टरों की ओर से प्रस्तुत तर्क उनकी बात को सिद्ध करते हैं, अस्पताल प्रबंधन को आदेश दिया कि वह डाक्टरों को उनका भुगतान मय ब्याज के लौटा दे।

लगातार इंकार करता रहा प्रबंधन

अस्पताल प्रबंधन की ओर से डाक्टरों का भुगतान रोके जाने से शुरू से इंकार किया जाता रहा, लेकिन न्यायालय ने अस्पताल की बात को नहीं माना।

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