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मध्यप्रदेश

राजस्थान के अलवर से साइकिल भ्रमण पर निकले दिलीप और विनोद को मध्य प्रदेश भाया

जबलपुर। पर्यावरण की रक्षा करना सभी का कर्तव्य है। ईश्वर की ओर से रचित प्रकृति ने हमे जल और प्राणवायु भरपूर मात्रा में प्रदान की है। हर व्यक्ति अपनी जरूरत के हिसाब से जल और वायु का उपयोग करते आ रहे हैं। पर्यावरण जागरुकता का संदेश देने के राजस्थान के अलवर जिले के दो युवा दिलीप और विनाेद देशभर में साइकिल से भ्रमण कर रहे हैं। बोले- मध्‍य प्रदेश की यात्रा बहुत अच्‍छी रही।

यात्रा का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण को बचाना

प्रत्येक राज्य में पहुंचकर पौधारोपण कर रहे हैं। साथ ही वहां के लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरुकता का संदेश दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यात्रा का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण को बचाना है। साथ ही छायादार पौधों का ही रोपण करते हैं। एमपी, गोवा और कर्नाटक की यात्रा बहुत अच्छी रहीं। उत्तर प्रदेश और बिहार जाने के बारे में भी विचार किया है।

10 से अधिक जिलों में कर चुके 6 हजार से अधिक पौधारोपण

राजस्थान के अलवर जिले से 11 मार्च को साइकिल यात्रा प्रारंभ करने वाले दिलीप मेघवाल ने एमएससी किया है। उन्होंने बताया कि आजकल हर जगह पेड़ो की कटाई हो रही है। साथ ही जंगल भी खत्म हो जा रहे है। इसलिए मैंने सोचा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए लोगों में जागरुकता पैदा करनी चाहिए। इसलिए साइकिल यात्रा प्रारंभ की। इसलिए जहां भी जाते है, वहां पौधारोपण जरूर करते हैं।

साइकिल में रोजमर्रा की जरूरत का सामान

मैं और विनोद दोनों अभी तक 6 हजार से अधिक पौधारोपण कर चुके हैं। 10 से अधिक जिलों में साइकिल भ्रमण कर पर्यावरण के लिए जागरुकता दे रहे हैं। विनोद लगभग दो महीने पहले ही उनके साथ यात्रा में शामिल हुए हैं। साइकिल में रोजमर्रा की जरूरत का सामान मौजूद है। शहर पुलिस ने दोनों युवाओं को सम्मानित किया।

सबसे दुखद अनुभव तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश का रहा

दिलीप ने कहा कि 10 राज्यों की यात्रा में सबसे दुखद अनुभव तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश का रहा। तमिलनाडु के नीलगिरी के जंगलों में मोबाइल तोड़ दिया गया था। आंध्र प्रदेश में मोबाइल और कैमरा दोनों ही चोरी हो गया। 11 मार्च को मैंने अकेले ही साइकिल यात्रा शुरू की थी। दो माह पहले अलवर के ही रहने वाले विनाेद मेरे साथ यात्रा में जुड़ गए।

60 से 70 किलोमीटर प्रतिदिन यात्रा

हम दोनों हर रोज 60 से 70 किलोमीटर की यात्रा करते हैं। साइकिल में एक क्यूआर कोड भी लगा है, जिससे पौधे खरीदने के लिए आर्थिक मदद मिल सके। यात्रा के दौरान का पूरा खर्च स्वयं का होता है। अब हम दोनों मंडला होते हुए छत्तीसगढ़ रवाना होंगे।

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