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पं. धीरेंद्र शास्त्री ने दिलाया जातिवाद खत्म करने का संकल्प।

भारत में से जातिवाद कोई माई का लाल खत्म नहीं कर सकता , भारत में सामाजिक व्यवस्था के आदेश केवल ब्राह्मणों और दरबारीयों मंत्रीयों की राय से केवल चकृवर्ती राजपूत राजा नियत कर राजाज्ञा जारी करता था और केवल वही ही संपूर्ण साम्राज्य में मान्य होती थी , अन्य राजाओं को भी इसका अधिकार नहीं था , अंतिम राजाज्ञायें तोमर राजपूत राजवंश ने जारीं कीं थी , जो कि तुलसीदास की रामचरित मानस की मान्यता के बारे में थी , यह राजाज्ञा चंबल की तोमरघार से दिल्लीपति महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर के उत्तराधिकारी राजवंश ने जारी की थी , भारत के सनातन धर्म के अंतिम चकृवर्ती सम्राट दिल्लीपति महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर थे , केवल उन्हें ही सनातन धर्म की या सामाजिक, आर्थिक , राजनैतिक , कूटनीतिक राजाज्ञायें जारी करने का अंतिम अधिकार था , उनके ब्राह्मण राजपुरोहित पाठक थे , वर्तमान में उपध्याय हैं , कुल गुरू और राजगुरू व्यास हैं , कथावाचक मिसुर जी मिश्रा हैं , पुजारी उपाध्याय हैं ..... ये ब्राह्मण और तोमर / व अन्य राजपूत जब तक नहीं कहेंगें , तब तक संसार तो क्या , भारत देश में भी कुछ नहीं होने जाने वाला , न कोई सामाजिक बदलाव होगा , न आर्थिक , न राजनैतिक और न कूटनीतिक , सरकार जब खुद ही जातिगत कानून ला कर देश को बर्बाद कर रही है , जब जातिगत आरक्षण देकर देश में जातिवाद फैला रही है , तो सपने में भी मत सोचना कि ये ब्राह्मण और राजपूत , समाजिक व्यवस्था बदलने में कभी भी किसी की कोई मदद करेंगें । पहले धीरेन्द्र को सरकार से जातिगत कानूनों मसलन एस एस टी एक्ट , जातिगत आरक्षण को खत्म करने का प्रण व संकल्प दिलाना चाहिये , उसके बाद ब्राह्मणों और राजपूतों से अनुरोध करना चाहिये कि वे अर्जी फर्जी जातिवादी हिंदू धर्म को खत्म करके , सनातन धर्म की पुन:स्थापना करे और साधु पुरूषों का उद्वार और कल्याण करे़ , दुष्टों का और अधर्म हिंदू और अन्य अधर्मों का विनाश करें , जगत में सनातन धर्म की धर्मध्वजा भारत के अंतिम चक‌वर्ती सम्राट दिल्लीपति महाराजा अनंगपाल सिंह तोमर की तरह फहरायें ।

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