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मध्यप्रदेश

अमावस्या पर मुनिश्री के सानिध्य में जैन त्रिशलगिरी पर बार्षिक जैन मेला लगा

मानवता सबसे बड़ा धर्म है, सदभावना की जरूरत घर-घर में है : मुनिश्री विनय सागर

मुनिश्री के सानिध्य में अमावस्य पर मंत्रो से इंद्रो ने भगवान जिनेंद्र का किया अभिषेक।
ग्वालियर-:मानव जीवन को चलाने के लिए धर्म और धन दोनों की जरूरत पड़ती है। व्यक्ति दिन-रात धन कमाने की सोचता रहता है लेकिन धर्म करने के लिए कुछ ही समय निकाल पाता है। मानवता को सबसे बड़ा धर्म कहा गया है। आज पारिवारिक बिखराव की वजह आपसी सद्बभवना का अभाव है। जो घर घर मे व्यक्ति के जीवन में सबसे आवश्यक है। यह बात श्रमण मुनिश्री विनय सागर महाराज ने आज रविवार को उरवाई गेट स्थित जैन तीर्थ त्रिशलगिरी जैन बार्षिक मेले पर शांति विधान में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही।
मुनिश्री ने कहा कि हर व्यक्ति के अंदर भगवान बनने, मोक्ष जाने के गुण मौजूद हैं। ना जाने पिछले कितने जीवन में यह आत्मा जन्म लेकर अमीर गरीब, जीव जंतु, बनती रही है। स्वर्ग-नर्क, निगोद में जाती रही है। जन्म जन्मांतर के भटकाव से मुक्ति का एकमात्र मार्ग मानव जीवन में धर्म के जरिए अर्जित किया जा सकता है। अतः मनुष्य जन्म में धर्म मार्ग के जरिए मुक्ति की राह पकड़ने के इस दुर्लभ अवसर को हाथ से नहीं जाने दे। इसी में हम सब का प्राणी मात्र का कल्याण है। मुनिश्री विनय सागर महाराज 26 सितंबर सोमवार को नई सड़क स्थित संजय किरण पंडवीय सासंद के निवास के पास 09 बजे  से प्रवचन व 10 बजे से आहराचार्य संपन्न होगी।
*जैन तीर्थ त्रिशलगिरी पर मुनिश्री ने बार्षिक जैन मेला में अभिषेक व शांतिधारा कराई*
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि श्रमण मुनिश्री विनय सागर जी महाराज के सानिध्य में उरवाई गेट स्थित जैन तीर्थ श्री दिगंबर जैन त्रिशलगिरी अतिशय पर 25 सितम्बर रविवार को अमावस्य पर वार्षिक जैन मेले का आयोजन हुआ। जैन तीर्थ त्रिशलगिरी अतिशय क्षेत्र पर मुनिश्री के सानिध्य में अमावस्य पर मंत्रो से इंद्रा राजेश मुकेश जैन, पिंटू दिनेश जैन भिंड परिवर ने भगवान जिनेंद्र का अभिषेक एवं शांतिधारा की। मुनिश्री के सानिध्य में महिलाओ ओर पुरुषों ने सामूहिक रूप से शांति विधान में पूजन अर्चना कर सगीतकार शुभम जैन सैमी के भजनों पर भक्ति नृत्य करते हुए महा अर्घ्य समर्पित किए। दोपहर में 2 बजे से बार्षिक जैन मेले में आने वाले भक्तों को विशाल भंडार प्रसादी वितरण की गई।

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