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समवशरण आदिनाथ विराजित कर भक्तामर महाकुंभ दीप अर्चना में गूँजे जयकारे।

भक्तामर स्तोत्र पापों से मुक्त कराकर पुण्य मार्ग की ओर अग्रसर करता है आर्यिकाश्री का लोहामंडी से पनिहार के लिए मंगल विहार हुआ, रात्रि विश्राम गुड़गुड़ी का नाका पर हुआ। ग्वालियर:-जब भी संतों, देश, समाज व परिवार के ऊपर कोई संकट आता है तो ऐसी स्थिति में शांत स्वभाव से भक्तामर विधान ही एकमात्र उपाय होता है। श्रद्धा भाव से किया गया भक्तामर स्तोत्र सुख शांति प्रदान करता है। जीवन की जटिलताओं को सहज बनाता है। पापों से मुक्त कराकर पुण्य मार्ग की ओर अग्रसर करता है। यदि किसी के जीवन में कोई संकट है तो भक्तामर स्तोत्र चमत्कार दे सकता है। यह विचार गणिनी आर्यिकाश्री आर्षमति माता जी ने लोहामंडी स्थित दिगबर लाला गोकुलचंद जैन मंदिर में भक्तामर दीप अर्चना में संबोधित करते हुए कही। गणिनी आर्यिकाश्री ने कहा जब भी किसी पर कोई संकट आता है तो ऐसी स्थिति में भक्तामर स्तोत्र ही एक मात्र उपाय है। भक्तामर स्तोत्र मंत्र यह 100 बार जाप करके जल आंखों पर लगा लें तो औषधि का काम करता है। भक्तामर स्तोत्र भक्ति प्रधान स्तोत्र है, जैन धर्म काव्य परंपरा में भक्तामर स्तोत्र की अपनी माहातम महिमा और गरिमा हैं। भक्तामर महापूजन का फल पुण्यदायी है। पूजा से मन को शांति मिलती है। शरीर के रोग आदि व्याधि दूर होती है। इसमें जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव परमात्मा के 44 श्लोक हैं। *गणिनी आर्यिकाश्री ने भक्तामर समवशरण में 48 परिवार के द्वार 48 दीपो से कराई महाअर्चना* नूतन वर्षभिनंदन पर जैन मंदिर में गणिनी आर्यिकाश्री आर्षमति माताजी के सानिध्य ब्रह्मचारी अंकुर भैया एवं प्रतिष्ठाचार्य शशि कांत शास्त्री के मार्गदर्शन में 48 परिवार द्वार 48 भक्तामर मढने पर 48 दीपो से आरधान की गई। कार्यक्रम शुभारंभ भगवान पार्श्वनाथ के चित्र का आवरण डॉ विनोद जैन एवं दीप प्रज्वलित पारस जैन अध्यक्ष सकल जैन महापंचायत ग्वालियर ने किया। वही भक्तामर स्त्रोत की महिमा का वचन गणिनी आर्यिकाश्री आर्ष मति माताजी ने भक्तामर के एक-एक काव्य रिद्धि-सिद्धि मंत्रों के उच्चारण के साथ संगीतमय मुख्य भक्तामर मढने पर राजेश पदमचंद जैन परिवार, दूसरे मढने विशभर दयाल जैन रोहित जैन, एवं तीसरे मढने पर महेशचंद्र लकी कुमार जैन परिवार सहित 48 परिवारों ने भक्तामर मढने पर 48 दीपक को प्रज्वलित कर समवशरण में विराजित भगवान आदिनाथ गणधर की आराधना के साथ समर्पित किये। कार्यक्रम के अंत में जैन समाज के द्वारा दीपक से महाआरती की गई। *भक्ति संगीतमय भजनों पर किया समाजजनों ने नृत्य* जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन आदर्श कलम ने बताया की कोलारस के प्रसिद्ध संगीतकार सुनील जैन ने संगीतमय भजन.... महावीर नाम लागे मुहे प्यारा-प्यारा....बाजे कुडलपुर में बधाई की नगरी में वीर जन्मे महावीर जी...छोटे बाबा रे पधरो मोरे अंगन रे....महावीर की मूंगावणी मूरत मनहारी कलष ढलो रे नार नारी....जैसे भजनो पर महिला, बालिकाएं और पुरुषों ने जमकर भक्तिकर नृत्य किया।

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