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मुरैना में स्वास्थ्य क्रांति: 500 करोड़ की लागत से बनेगा 1000 बिस्तर का भव्य मेडिकल कॉलेज, पीपीपी मोड की टीम ने परखा जिला अस्पताल

मुरैना। चंबल अंचल के मरीजों के लिए राहत भरी बड़ी खबर सामने आ रही है। जिले में लंबे समय से प्रतीक्षित मेडिकल कॉलेज की स्थापना की कवायद अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। शहर में अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं को विस्तार देने के लिए लगभग 500 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से 1000 बिस्तरों वाला विशाल मेडिकल कॉलेज तैयार किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए शासन द्वारा पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर संचालन की तैयारी की जा रही है, जिसके तहत विशेषज्ञ टीम ने शनिवार को जिला अस्पताल का सघन निरीक्षण किया। विशेषज्ञ टीम ने जांचीं जमीनी व्यवस्थाएं मेडिकल कॉलेज के संचालन को लेकर नियुक्त की गई पीपीपी मोड की टीम जिला अस्पताल पहुंची। टीम के सदस्यों ने अस्पताल के विभिन्न वार्डों, ओपीडी, आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर और उपलब्ध भूमि का बारीकी से मुआयना किया। टीम ने इस बात का आकलन किया कि वर्तमान जिला अस्पताल को किस तरह मेडिकल कॉलेज के अस्पताल के रूप में अपग्रेड किया जा सकता है। निरीक्षण के दौरान टीम ने संसाधनों की उपलब्धता, मरीजों का औसत दबाव और भविष्य की जरूरतों पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है। 500 करोड़ का निवेश और 1000 बेड की क्षमता प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज केवल मुरैना ही नहीं, बल्कि पड़ोसी जिलों और राजस्थान-धौलपुर सीमा से सटे क्षेत्रों के लिए भी संजीवनी साबित होगा। जानकारी के अनुसार: लागत: परियोजना पर करीब 500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। क्षमता: कॉलेज से संबद्ध अस्पताल में 1000 बेड होंगे, जिससे गंभीर मरीजों को ग्वालियर या दिल्ली रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सुविधाएं: इसमें अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक सेंटर, ट्रॉमा सेंटर, सुपर स्पेशलिटी विंग और छात्रों के लिए उच्च स्तरीय एकेडमिक ब्लॉक बनाया जाएगा। पीपीपी मोड से संचालन की तैयारी सरकार इस बड़े प्रोजेक्ट को पीपीपी मोड पर चलाने पर विचार कर रही है, ताकि प्रबंधन और चिकित्सा सुविधाओं की गुणवत्ता निजी क्षेत्र की कुशलता के साथ सरकारी निगरानी में बनी रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मॉडल से अस्पताल में डॉक्टरों की कमी नहीं होगी और मरीजों को चौबीसों घंटे सुपर-स्पेशलिस्ट सेवाएं मिल सकेंगी। निरीक्षण दल अब अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगा, जिसके बाद टेंडर और निर्माण की प्रक्रिया में तेजी आएगी। अंचल को मिलेगा बड़ा लाभ वर्तमान में मुरैना के मरीजों को न्यूरोसर्जरी, कार्डियोलॉजी और नेफ्रोलॉजी जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए ग्वालियर या जयपुर की दौड़ लगानी पड़ती है। 1000 बेड का अस्पताल बनने से न केवल इलाज सस्ता होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही, हर साल सैकड़ों युवा डॉक्टर मुरैना के इसी कॉलेज से अपनी एमबीबीएस और पीजी की पढ़ाई पूरी कर सकेंगे। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन का चयन और प्रारंभिक रूपरेखा पहले ही तय की जा चुकी है। अब टीम के दौरे के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि चंबल की स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर जल्द ही बदलने वाली है।

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