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सिस्टम की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: CAG रिपोर्ट ने खोली एमपी सरकार की पोल साहब सो गए, सरकारी जमीन वक्फ की हो गई: CAG का बड़ा धमाका।

मध्य प्रदेश में सरकारी तंत्र की लापरवाही और भ्रष्टाचार का एक ऐसा कच्चा चिट्ठा सामने आया है, जिसने सत्ता के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि कैसे अफसरों की नाक के नीचे सरकारी खजाने और जमीन की बंदरबांट की गई। 1. सरकारी जमीन पर 'कब्जा' और वक्फ की मौज रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश के 20 जिलों में कलेक्टरों की भारी लापरवाही के कारण 77 करोड़ रुपये की 33 सरकारी संपत्तियां वक्फ बोर्ड के नाम दर्ज हो गईं। वक्फ की 81 संपत्तियों की जांच हुई तो पता चला कि 41 फीसदी संपत्तियां असल में सरकारी थीं। हद तो तब हो गई जब सरकार ने इसे 'तकनीकी गलती' कहकर पल्ला झाड़ना चाहा, लेकिन CAG ने इस दलील को सिरे से खारिज करते हुए इसे सीधे तौर पर वक्फ एक्ट का दुरुपयोग और सरकारी जमीन पर कब्जा करार दिया। 2. PWD का 'सड़क' घोटाला लोक निर्माण विभाग (PWD) की कारस्तानी ऐसी कि रायसेन में 4.5 किलोमीटर लंबी सड़क वहां बना दी गई जो कुछ ही दिनों में डूब क्षेत्र में आने वाली थी। इतना ही नहीं, विदिशा और नर्मदापुरम में अधिकारियों ने अपनी मर्जी से 'एक्स्ट्रा' लंबी सड़कें बनाकर सरकार को 15 करोड़ रुपये का चूना लगा दिया। 3. नगर निगमों में 260 करोड़ का 'लापता' हिसाब इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन जैसे बड़े नगर निगमों का हाल यह है कि वे 260 करोड़ रुपये के आश्रय शुल्क का हिसाब तक नहीं दे पा रहे हैं। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की चुप्पी की वजह से पूरे प्रदेश में अवैध कॉलोनियों का जाल बिछ गया, जिससे राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा है। 4. सिस्टम की विफलता पर मुहर यह रिपोर्ट 2018 से 2023 के बीच की है, जिसमें 14 सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। CAG ने साफ कहा है कि अगर कलेक्टर वक्त पर जाग जाते और रजिस्ट्री प्रक्रिया पर रोक लगाते, तो आज सरकारी संपत्तियां निजी हाथों या बोर्डों के पास न होतीं।

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