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मुरैना अधिकारियों और ठेकेदारों की साठगांठ: से चंबल वाटर प्रोजेक्ट चढ़ा भ्रष्टाचार की भेंट बना ‘कमाई का अड्डा’
चंबल नदी घाटी परियोजना, जो कभी राजस्थान और मध्य प्रदेश के लिए 'जीवनदायिनी' मानी जाती थी, आज भ्रष्टाचार, कुप्रबंधन और ढुलमुल सरकारी रवैये का शिकार होकर रह गई है। करोड़ों के बजट और दशकों के इंतज़ार के बाद भी धरातल पर जो तस्वीर उभर रही है, वह विकास के दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। 1. नहरों का जंजाल: पानी कम, लीकेज ज़्यादा परियोजना की मुख्य नहरों और वितरिकाओं की हालत खस्ता है। मरम्मत के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये कागजों में बहा दिए जाते हैं, लेकिन हकीकत में अंतिम छोर (Tail end) पर बैठा किसान आज भी एक-एक बूंद पानी के लिए तरस रहा है। नहरों में जमा गाद और जगह-जगह हो रहे लीकेज ने सिंचाई की क्षमता को आधा कर दिया है। 2. अंतरराज्यीय विवाद: समझौतों की बलि चढ़ता हक मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच पानी के बंटवारे को लेकर जारी खींचतान ने इस प्रोजेक्ट को फुटबाल बना दिया है। गांधी सागर, राणा प्रताप सागर और कोटा बैराज के पानी पर दोनों राज्यों के अपने-अपने दावे हैं। इस 'सियासी रस्साकशी' में नुकसान सिर्फ आम जनता का हो रहा है, जिसे समय पर अपनी फसलों के लिए पानी नहीं मिल पाता। 3. बजट का 'मायाजाल' और कछुआ चाल काम चंबल प्रोजेक्ट के जीर्णोद्धार और आधुनिकिकरण के लिए आवंटित फंड कहाँ गायब हो जाता है, यह जांच का विषय है। कई सालों से लंबित प्रोजेक्ट्स की लागत तो बढ़ रही है, लेकिन काम की रफ्तार 'कछुआ चाल' से भी धीमी है। ठेकेदारों और अधिकारियों की जुगलबंदी ने प्रोजेक्ट को सिर्फ पैसे बनाने की मशीन बना दिया है। 4. पर्यावरणीय संकट: मरती नदी, उजड़ता पारिस्थितिकी तंत्र सिर्फ पानी ही नहीं, चंबल का इकोसिस्टम भी खतरे में है। अवैध रेत खनन और औद्योगिक कचरे ने नदी के स्वरूप को बिगाड़ दिया है। घड़ियालों और दुर्लभ डॉल्फिन के संरक्षण के नाम पर आने वाला बजट भी फाइलों तक सीमित है, जबकि नदी का जलस्तर लगातार गिर रहा है। 5. किसान का आक्रोश: वादों से नहीं भरेगा पेट जब तक सरकारी तंत्र अपनी सुस्ती त्यागकर धरातल पर काम नहीं दिखाएगा, तब तक चंबल प्रोजेक्ट केवल एक 'सफेद हाथी' बनकर रह जाएगा। किसान अब खोखले वादों से ऊब चुका है। यदि समय रहते नहरों की मरम्मत और पानी का समान वितरण सुनिश्चित नहीं किया गया, तो चंबल के बीहड़ों से उठने वाला असंतोष सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।


