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मुरैना में स्वास्थ्य के नाम पर खिलवाड़: सैंपल का नाटक और भ्रष्टाचार का खेल जारी!”

मुरैना। चंबल की धरती, जो कभी अपनी वीरता के लिए जानी जाती थी, आज मिलावटखोरों की सुरक्षित शरणस्थली बन चुकी है। मुरैना का खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग भ्रष्टाचार और अकर्मण्यता की ऐसी चादर ओढ़कर सोया है, जिससे उठने वाली दुर्गंध अब आम जनता का दम घोंट रही है। जिले में जहरीले दूध, सिंथेटिक पनीर और मिलावटी मावे का कारोबार किसी कुटीर उद्योग की तरह फल-फूल रहा है, लेकिन विभाग की कार्रवाई केवल "सैंपल भरने" और "नोटिस थमाने" तक सीमित रह गई है। साठगांठ का खुला खेल विश्वस्त सूत्रों की मानें तो खाद्य विभाग के अधिकारियों और मिलावटखोरों के बीच एक गहरा 'नेटवर्क' काम कर रहा है। जब भी टीम फील्ड में निकलती है, बड़े माफियाओं को पहले ही सूचना मिल जाती है और उनकी भट्टियां ठंडी हो जाती हैं। विभाग केवल उन छोटे दुकानदारों पर गाज गिराकर अपनी पीठ थपथपाता है, जिनके पास 'प्रोटेक्शन मनी' देने की ताकत नहीं है। सवाल यह है कि आखिर मुरैना से हर दिन सैकड़ों टन नकली मावा और पनीर बाहर के राज्यों में कैसे सप्लाई हो रहा है? क्या विभाग की आँखों पर पट्टी बंधी है या फिर उनकी जेबें गर्म की जा रही हैं? लैब की रिपोर्ट का 'इंतज़ार' या 'सेटिंग'? कार्रवाई के नाम पर विभाग सैंपल तो लेता है, लेकिन उनकी रिपोर्ट आने में महीनों लग जाते हैं। रिपोर्ट आने तक वह बैच बाज़ार में खप चुका होता है और लोग उसे खाकर बीमार पड़ चुके होते हैं। अक्सर देखा गया है कि रिपोर्ट को रफा-दफा करने या उसे कमजोर बनाने के लिए पर्दे के पीछे लंबा लेन-देन चलता है। जिले में कैंसर, लिवर और पेट की बीमारियों के बढ़ते मामले इस बात का सबूत हैं कि हम जो खा रहे हैं, वह भोजन नहीं बल्कि धीमा जहर है। खानापूर्ति से नहीं चलेगा काम त्योहार आते ही विभाग की गाड़ियां सड़कों पर सायरन बजाती हुई तो दिखती हैं, लेकिन शाम ढलते ही सब कुछ पुराने ढर्रे पर लौट आता है। जनता अब पूछ रही है कि आखिर कितने मिलावटखोरों को जेल भेजा गया? कितने कारखानों पर स्थाई ताले लटके? वास्तविकता यह है कि आंकड़े केवल फाइलों में चमकते हैं, हकीकत में मुरैना की मंडियां आज भी मिलावट के काले कारोबार से सनी हुई हैं। यदि प्रशासन ने जल्द ही इन 'कुर्सीधारी रक्षकों' की जवाबदेही तय नहीं की, तो मुरैना की जनता का स्वास्थ्य पूरी तरह तबाह हो जाएगा। अब समय केवल सैंपल लेने का नहीं, बल्कि उन चेहरों को बेनकाब करने का है जो चांदी के चंद सिक्कों के लिए मासूमों की थाली में जहर परोस रहे हैं।

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