ब्रेकिंग
जनपद कार्यालय बना अखाड़ा! सीईओ ने तीन जनपद सदस्यों पर धमकी और अभद्रता का कराया मामला दर्ज दिल्ली के होटल में भीषण आग, 21 मौतों की खबर से हड़कंप प्यासी मुरैना और पानी में मस्ती! समर वेव वॉटर पार्क पर उठने लगे सवाल मुरैना सगाई पक्की होते ही दूल्हे पर हमला लड़की देखकर लौट रहे युवक को घेरकर बदमाशों ने पीटा, चेन-अंगू... बामौर थाना : तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने बुजुर्ग को मारी टक्कर दिमनी थाना : जहरीला पदार्थ खाने से वृद्ध की मौत, जांच शुरू पोरसा थाना : कट्टा लेकर घूम रहे युवक को पुलिस ने दबोचा सगाई की खुशियों के बीच करोड़ों की चोरी से सनसनी बीजेपी नेता के भाई के घर दिनदहाड़े वारदात सरकारी जमीन विवाद में खूनी संघर्ष, फायरिंग में युवक की मौत, दो महिलाएं घायल मुरैना: सबलगढ़ के गुरैमा गांव में भीषण आग, ग्रामीणों की तत्परता से टला बड़ा हादसा
मध्यप्रदेश

शिव मंदिरों की श्रृंखला, जहां चौकोर शिवलिंग को छूकर निकल जाता है झरने का पानी

मुरैना 10 अक्टूबर 2022/ नरेश्वर ग्वालियर से लगभग 30 किमी और मुरैना से लगभग 50 किमी दूर स्थित शिव मंदिरों की एक श्रृंखला है। हालांकि यहां पहुंचने का रास्ता अभी ठीक नहीं है। लेकिन इन मंदिरों के बारे में कहा जाता है कि इनका निर्माण तीसरी से सातवीं शताब्दी में हुआ था। यह गुप्त काल में बनाया गया था या गुर्जर प्रतिहार काल में अभी तक पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है। नरेश्वर मंदिर के पास तालाब हैं। इसलिए यहां चट्टानों को काटकर उनके नीचे शिव मंदिरों का निर्माण किया गया। यानी जल लोक को शिवधाम में बदल दिया गया। बरसात के दिनों में तालाबों से गिरने वाले झरने का पानी शिवलिंग को छूकर निकल जाता है। ऐसे में यहां का नजारा काफी मंत्रमुग्ध कर देने वाला होता है।
ऐतिहासिक धार्मिक स्थल नरेश्वर का इलाका इतना दुर्गम है कि यहां तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है। उबड़-खाबड़ रास्तों से करीब तीन किलोमीटर चलने के बाद यह जगह जंगल से घिरे पहाड़ों में मौजूद है। यहां मंदिरों का निर्माण तीसरी से पांचवीं शताब्दी (गुप्त काल) में माना जाता है, लेकिन उनकी भव्यता नौवीं शताब्दी के प्रतिहार काल में फली-फूली।
नरेश्वरी में ये हैं खास
वर्तमान में यहां 23 मंदिरों की श्रंखला है, जिसमें एक मंदिर हरसिद्धि माता का है, बाकी मंदिरों में शिवलिंग है। 23 मंदिरों के अलावा 20 से 25 मंदिर खंडहर में पत्थरों के रूप में बिखरे हुए हैं। यहां के मंदिरों का निर्माण वर्गाकार है, जो देश में कहीं भी देखने को नहीं मिलता है। नरेश्वर मंदिर का मुख्य शिवलिंग भी वर्गाकार यानी चौकोर है।
– आश्चर्य से भरे इस स्थान पर जल निकासी और संरक्षण का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। पहाड़ी की चोटी पर बने मंदिरों के पीछे दो तालाब हैं, जो बारिश में भर जाते हैं। इन तालाबों का पानी ऊपर से, बीच से और मंदिर के नीचे से इस तरह निकाला गया है कि आज तक मंदिरों को कोई नुकसान नहीं हुआ है। बारिश के दिनों में तालाब लबालब हो जाते हैं और इसी जल से मुख्य शिवलिंग का जलाभिषेक भी स्वतः ही हो जाता है।
पत्थर के ढेर से निकल रहे मंदिर के अवशेष
एएसआई द्वारा यहां जीर्णाद्धार का काम शुरू करने से पहले धंसे हुए पत्थर के ढेर की खुदाई की गई। यहां बने मंदिरों के कई हिस्से इन्हीं ढेरों से निकले हैं। इन हिस्सों को जोड़कर कुछ मंदिरों को फिर से खड़ा किया गया है। इनमें एक हनुमान मंदिर भी है। इस मंदिर परिसर में हनुमान मंदिर के अलावा एक दुर्गा मंदिर भी है, जो ऊंचाई पर अलग से बनाया गया है।
कैसे पहुंचे नरेश्वर
मुरैना से नूराबाद शहर होते हुए रिठौरा और रिठौरा से नरेश्वर पहुंचा जा सकता है। इसी तरह ग्वालियर से मालनपुर होते हुए यहां पहुंचा जा सकता है। वाहनों को मंदिर से करीब तीन किमी पहले ही छोड़ना पड़ता है और वहां से पैदल चलकर नरेश्वर के मंदिरों तक पहुंचा जा सकता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button