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मध्यप्रदेश

निमाड़ और मालवा पर मानसून मेहरबान विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र में बेरुखी

भोपाल। आठ दिन की देरी से प्रदेश में पहुंचे मानसून की शुरुआत काफी अच्छी रही थी। अधिकतर जिलों में रुक-रुककर वर्षा होने से खासी राहत मिली थी। जुलाई के मध्य से मानसून प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र पर तो कुछ मेहरबान है, लेकिन पूर्वी क्षेत्र के प्रति उसकी बेरुखी बनी हुई है। वर्तमान स्थिति में वर्षा के मामले में निमाड़, मालवा क्षेत्र तो मालामाल है, लेकिन विंध्य और बुंदेलखंड के आधे से अधिक क्षेत्र में सामान्य से काफी कम वर्षा हुई है।

मौसम प्रणाली के न आने से अल्प वर्षा की स्थिति

मौसम विज्ञानियों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी से ओडिशा, छत्तीसगढ़ के रास्ते से किसी मौसम प्रणाली के न आने से अल्प वर्षा की स्थिति बनी हुई है। शुक्रवार को भी भोपाल, नर्मदापुरम, जबलपुर, इंदौर, उज्जैन संभाग के जिलों में कहीं-कहीं वर्षा हो सकती है। उधर गुरुवार को सुबह साढ़े आठ बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक इंदौर में 6.4,गुना में छह, छिंदवाड़ा में एक मिलीमीटर वर्षा हुई। उज्जैन में बूंदाबांदी हुई।

मध्‍य प्रदेश में कुल 430.9 मिमी. वर्षा

मौसम विज्ञान केंद्र से मिली जानकारी के मुताबिक इस सीजन में एक जून से 27 जुलाई की सुबह साढ़े आठ बजे तक प्रदेश में कुल 430.9 मिमी. वर्षा हुई है। जो सामान्य वर्षा (407 मिमी.) की तुलना में छह प्रतिशत अधिक है।

यह मौसम प्रणालियां हैं सक्रिय

वर्तमान में एक कम दबाव का क्षेत्र दक्षिण ओडिशा एवं उससे लगे उत्तरी आंध्रा के तट पर बना हुआ है। मानसून द्रोणिका बीकानेर, कोटा, रायसेन, दुर्ग, ओडिशा से कम दबाव के क्षेत्र से होते हुए बंगाल की खाड़ी तक जा रही है। पंजाब पर हवा के ऊपरी भाग में एक चक्रवात बना हुआ है। मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्व वरिष्ठ मौसम विज्ञानी अजय शुक्ला ने बताया कि कम दबाव के क्षेत्र के और कमजोर पड़कर बंगाल की तरफ बढ़ने के आसार हैं। साथ ही मानसून द्रोणिका के भी सामान्य स्थिति से ऊपर बढ़ने की संभावना है। इस वजह से दो दिन बाद मानसून की गतिविधियों में काफी कमी आ सकती है।

क्यों नहीं हो रही पूरे प्रदेश में वर्षा

शुक्ला के मुताबिक मानसून के प्रवेश के बाद बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र ओडिशा, छत्तीसगढ़ होकर मप्र में आया था। उसके प्रभाव से पूरे प्रदेश में अच्छी वर्षा हुई थी। उसके बाद से बंगाल की खाड़ी में कम दबाव के क्षेत्र बने लेकिन ओडिशा के बाद उनका रुख आंध्रा की तरफ रहा। इस वजह से सिर्फ मानसून द्रोणिका के बने रहने से मिल रही नमी के कारण पश्चिमी मप्र में रुक-रुककर वर्षा हो रही है।

वर्षा की स्थिति

कहां वर्षा हुई सामान्य सामान्य से कम/अधिक

मध्यप्रदेश 430.9 407.0 छह प्रतिशत अधिक

पूर्वी मप्र 422.5 448.7 छह प्रतिशत कम

पश्चिमी मप्र 437.3 375.0 17 प्रतिशत अधिक

विंध्य, बुंदेलखंड के जिलों की स्थिति

जिला वर्षा हुई सामान्य सामान्य से कम/अधिक

सतना 198.0 396.6 50 प्रतिशत कम

रीवा 229.4 397.0 42 प्रतिशत कम

सीधी 281.3 436.3 36 प्रतिशत कम

सिंगरौली 236.1 358.4 34 प्रतिशत कम

दमोह 329.2 458.6 28 प्रतिशत कम

टीकमगढ़ 301.2 408.3 26 प्रतिशत कम

पन्ना 333.3 439.8 24 प्रतिशत कम

निमाड़, मालवा क्षेत्र के जिलों की स्थिति

जिला वर्षा हुई सामान्य सामान्य से कम/अधिक

बुरहानपुर 567.7 324.1 75 प्रतिशत अधिक

इंदौर 610.9 366.1 67 प्रतिशत अधिक

रतलाम 569.0 366.0 55 प्रतिशत अधिक

नीमच 467.9 312.8 50 प्रतिशत अधिक

सीहोर 622.7 449.2 39 प्रतिशत अधिक

उज्जैन 501.0 375.9 33 प्रतिशत अधिक

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