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मध्यप्रदेश

छात्रवृत्ति घोटाले में फंसे इंदौर के पैरामेडिकल संस्थान को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत

जबलपुर। सुप्रीम कोर्ट ने पैरामेडिकल छात्रवृत्ति घोटाले में फंसे इंदौर के एक पैरामेडिकल संस्थान को आगामी तीन माह के लिए वसूली से अंतरिम राहत दे दी है। न्यायमूर्ति विक्रमनाथ व न्यायमूर्ति अमनुल्लाह की युगलपीठ ने शासन को निर्देश दिए कि इंदौर के पैरामेडिकल टेक्नोलाजी आर्गनाइजेशन आफ मध्यप्रदेश की सील 24 घंटे के भीतर खोल दें। इसके साथ ही वहां अध्ययनरत छात्रों को पढ़ाई की अनुमति दें। हाई कोर्ट ने प्रदेश की कई संस्थानों से वसूली करने के निर्देश दिए थे। वहीं शासन ने कुछ संस्थाओं को सील कर दिया था। उक्त संस्थान ने हाईकोर्ट के आदेश के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी।

यह दी गई दलील

संस्थान की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि सुनवाई का मौका दिए बिना वसूली प्रारंभ कर दी गई है। दस साल पुराने प्रकरण मे पांच सौ से अधिक छात्रों को शिक्षण देने वाले संस्थान को सील कर दिया गया, जिससे सभी छात्रों के अध्यन व भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

यह था मामला

साल 2012-13 के दौरान पैरामेडिकल कालेजों ने एसटी, एससी छात्रों के दस्तावेज लेकर उन्हें अपने यहां प्रवेश होना बता दिया और इसकी छात्रवृत्ति शासन से ले ली। घोटाला उजागर होने के बाद इंदौर में तत्कालीन कलेक्टर ने इसकी जांच कराई थी। इसके बाद से शासन द्वारा वसूली की कवायद की जा रही है। बाद में मामला कोर्ट चला गया। अब उच्च न्यायालय के आदेश से वसूली की जा रही है। जिससे राहत पाने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका लगाई गई थी।

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