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मध्यप्रदेश

जानिये कब लाए गए थे चीते कैसे नामकरण हुआ कब-कब हुई मौत

कूनो नेशनल पार्क में चीतों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। शुक्रवार को यहां एक और नर चीता सूरज की मौत हो गई है। सूरज को दक्षिण अफ्रीका से लाया गया था। खुले जंगल मे छोड़े गए चीतों में सूरज की पहली मौत हुई है जो चिंता का विषय है। चिकित्सकों ने मृत्यु के कारणों का अभी खुलासा नहीं किया है। इससे पहले मंगलवार को तेजस नामक चीता की गर्दन में चोट आने वजह से मौत हो गई। अब तक कूनो नेशनल पार्क में 5 चीता सहित 3 शावक की मौत हो चुकी है। यहां जानिये कि यह प्रोजेक्‍ट कब शुरू हुआ था, चीतों के नामकरण की क्‍या प्रक्रिया थी और अभी तक कितने चीतों की मौत हो चुकी है।

कब लाए गए थे चीते

-17 सिंतबर 2022 को नामीबिया से 8 चीते लाकर भारत में चीता प्रोजेक्ट की शुरुअात की गई। इनमें तीन नर और पांच मादी थीं।

– 750 वर्ग किलो मीटर में फैले कूनो नेशनल पार्क में बने बाडो़ं में इन चीतों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इन चीतों को छोड़ा।

– 18 फरवरी को दक्षिण अफ्रीका से लाए गए 12 चीते, जिसमें 7 नर और 05 मादा शामिल है।

– 450 से ज्यादा चीता मित्र चीतों की सुरक्षा व ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए वन विभाग ने तैयार किए हैं।

– 91 करोड़ से अधिक रूपये चीता प्रोजेक्ट पर कुल खर्च किए गए थे।

ऐसे हुआ था नामकरण

चीतों के नामीबियाई और दक्षिण अफ्रीकी नाम की जगह भारतीय नाम रखने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 25 सितंबर 2022 को मन की बात कार्यक्रम में देश के नागरिकों से चीतों के नए नाम सुझाने के बारे में अनुरोध किया था। इस संबंध में भारत सरकार के प्लेटफॉर्म mygov.in पर 26 सितंबर से 31 अक्टूबर 2022 तक एक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। इस प्रतियोगिता में कुल 11,565 प्रविष्टियां प्राप्त हुई, जिनमें देश में लाए गए इन चीतों के नए नाम सुझाए गए थे। इन प्राप्त प्रविष्टियों की एक चयन समिति द्वारा जांच की गई और सुझाए गए नामों के संरक्षण और सांस्कृतिक मूल्यों के महत्व और प्रासंगिकता के आधार पर नामों का चयन किया गया है। इसकी घोषणा 20 अप्रैल 2023 को की गई।

कूनो में चीतों की कब-कब हुई मौत

-27 मार्च को किडनी में संक्रमण के चलते चार साल की मादा चीता साशा की मौत।

– 23 अप्रैल को नर चीता उदय की हार्टअटैक से मौत हो गई थी। उसे बाड़े में लड़खड़ाकर अचानक बहोश होते देखा गया था।

-9 मई को बाड़े में दो नर चीतों अग्नि और वायु के साथ संघर्ष में मादा चीता दक्षा की मौत हो गई थी।

-23 मई को एक चीता शावक की मौत हुई। इसे सियाया (ज्वाला) चीता ने जन्मा था

-25 मई को ज्वाला के दो अन्य शावकों की मौत हुई।

-11 जुलाई को चीता तेजस की मौत हो गई। इसे दक्षिण अफ्रीका से लाया गया था।

– 14 जुलाई को चीता सूरज की मौत

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