नीलाम नहीं हो पाई कबाड़ बसें तो बना दिया बस्ती पुस्तकालय चेजिंग रूम थैला-बर्तन बैंक
जबलपुर। चलन से बाहर हो चुकी 40 खटारा मेट्रो बसों को नीलाम करने नगर निगम ने निविदा तो जारी की पर कीमत इतनी ज्यादा लगा दी कि कोई ठेकेदार आगे नही आया। वर्षा के दौरान खटारा बसें पूरी तरह से कबाड़ न हो जाएं इसके लिए नगर निगम ने नवाचार करते हुए कबाड़ हो रही मेट्रो बसों में रंग-रोगन कर बस्ती पुस्तकालय, महिलाओं के लिए चेजिंग रूम और थैला-बर्तन बैंक और निराश्रितों के रहने के लिए रैन बसेरा बना दिया। अब ये कबाड़ मेट्रो बसें चलन से तो बाहर हैं पर नए रूप-रंग में लोगों के लिए उपयोगी बन गई हैं। नगर निगम ने प्रयोग के तौर पर 40 में से अभी करीब छह बड़ी मेट्रो बसों को जनउपयोगी बनाया है। शेष बसों को भी उपयोगिता के हिसाब से नया स्वरूप दिया जाएगा। वहीं चलन से बाहर हो चुकी पुरानी बसों की भरपाई अब तक नहीं हो पाई है। अमृत योजना के तहत शहर को 200 नई मेट्रो बसें मिलनी है लेकिन एक वर्ष बीतने को है पर अब तक 55 बसें ही मिल पाई हैं। जिससे आने वाले दिनों में शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था बिगड़ सकती है।
नीलामी में साढ़े सात लाख आंकी गई थी एक बस की कीमत
विदित हो कि करीब चार माह पूर्व नगर निगम ने चलन से बाहर हो चुकी मेट्रो बसों की नीलाम करने के लिए निविदा जारी की थी। लेकिन एक बस की कीमत करीब साढ़े सात लाख रुपये आंकी गई। हुआ ये कि कोई निविदा भरने आगे नहीं आया और बसों की नीलामी प्रक्रिया टल गई। अंतरराज्यीय बस टर्मिनल और बस डिपो में खड़ी बसें कबाड़ होने लगी। जिसे देखते हुए नगर निगम ने इन बसों का नवाचार करने का निर्णय लिया और इनका कायाकल्प कर इन्हें जनउपयोगी बनाया जा रहा।
इस तरह कबाड़ बसों को बनाया जनउपयोगी
- – 6 बसों को बस्ती पुस्तकालय बनाया गया है। एक बस को रानीताल एनएमटी में खड़ा किया गया है। बस्ती पुस्तकालय में फिलहाल छोटे बच्चों के मनोरंजन के लिए प्रेरक कहानिया, कामिक्स आदि रखी गई हैं। दूसरी बस भी पुस्तकालय बनकर तैयार है। चार और बसों को बस्ती पुस्तालय बनाया जा रहा है। जो अलग-अलग बस्तियों के पास स्थापित की जाएगी।
- – 1 बस को चेजिंग रूम में बनाया गया है। इसे नर्मटा तटों में विशेष अवसर पर खड़ा किया जाएगा। इन बसों महिलाओं के कपड़े बदलने से लेकर सिंगार करने के लिए आइना, कंघी आदि भी उपलब्ध रहेगा। दो बसों को और तैयार किया जा रहा है।
- – 2 बसों को थैला बैंक का स्वरूप दिया गया है। स्वच्छ सर्वेक्षण के तहत थैला बैंक में थैला रखे जाएंगे जो बाजार क्षेत्र में उपलब्ध रहेंगे। नागरिकों को वाजिफ कीमत में कपड़े के थैले उपलब्ध कराए जाएंगे।
- – 1 बस को बर्तन बैंक भी बनाया गया है। जिसमें सभी प्रकार के बर्तन रहेंगे। इसे तैयार करने के पीछे तर्क दिया जा रहा है कि इसका कन्या विवाह योजना के तहत व अन्य आयोजनों में किया जाएगा।
- – 1 बस को रैन बसेरा के रूप में तैयार किया गया है ताकि यात्री व अन्य नागरिक इसमें ठहर सके। अंतरराज्यीय बस टर्मिनल में खड़ा कराया गया है।
13 साल पहले खरीदी गईं थी मेट्रो बसें
विदित हो कि जवाहर लाल नेहरू अर्बन मिशन के तहत नगर निगम ने 13 वर्ष पूर्व 2010 में करीब 32 करोड़ रुपये की लागत से 116 मेट्रो बसें खरीदी थी। समय के साथ इनमें से 40 बसें खराब हो गई गई और इन्हें खड़ा कर दिया गया। शेष 76 बसें चलन में तो है पर फ्लाई ओवर निर्माण, सीवर लाइन कार्य सहित अन्य कार्यों के चलते सिर्फ 40 पुरानी बसों का संचालन किया जा रहा है। वर्तमान में नागरिकों की सुविधा के लिए 40 पुरानी अौर 55 नई मेट्रो बसें ही संचालित हाे रही हैं।
अमृत से छलकी सिर्फ 55 बसें
वर्ष 2023 के बाद पुरानी सभी मेट्रो बसें चलन से बाहर कर दी जाएगी। लेकिन अमृत योजना के तहत जबलपुर को मिलने वाली 200 मेट्रो बसों में से सिर्फ 55 बसें ही मिल पाई है। शेष 145 बसें कब मिलेगी इसका जबाव जिम्मेदारों के पास भी नही है। माना जा रहा है कि यदि जल्द ही नई बसों की खेप नहीं आई आई तो सार्वजनिक परिवहन सुविधा लड़खड़ा सकती है।
इनका कहना है..
चलन से बाहर हो करीब 40 पुरानी मेट्रो बसों की नीलामी की जानी थी। निविदा जारी करने के बाद भी कोई आगे नहीं आया लिहाजा इन पुरानी बसों में नवाचार करते हुए इन्हें जनउपयोगी बनाया जा रहा है। लोग इसे पंसद भी कर रहे हैं। अमृत योजना के तहत नई मेट्रो बसें कब तक मिलेगी ये शासन तय करेगा।-सचिन विश्वकर्मा, सीईओ जबलपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड




