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मध्यप्रदेश

मप्र लोक सेवा आयोग विशेष परीक्षा मामले में हर हाल में जवाब पेश करे

जबलपुर। सुप्रीम कोर्ट ने मप्र लोकसेवा आयोग द्वारा आयोजित पीएससी विशेष परीक्षा-2019 के मामले में अगामी सुनवाई तक हर हाल में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 14 जुलाई को निर्धारित की गई है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि भर्ती प्रक्रिया अंतिम निर्णय के अधीन अत: परिणाम के लिए आयोग स्वयं जिम्मेदार होगा।

सुको ने भर्ती प्रक्रिया को अंतिम निर्णय के अधीन रखाः

दरअसल बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी व न्यायमूर्ति संजय कुमार की युगलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने साफ किया कि इस मामले में अंतिम निर्णय के पहले यदि आयोग भर्ती संबंधित कोई कार्रवाई करता है तो इसके परिणाम के लिए वह स्वयं जिम्मेदार होगा। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया को याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रखा है, इसके बावजूद आयोग की कार्रवाई जारी है।

हाईकोर्ट ने दिए थे 2700 अभ्यर्थियों की विशेष परीक्षा कराने निर्देशः

उल्लेखनीय है कि पूर्व में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एससी, एसटी व ओबीसी के लगभग 2700 अभ्यर्थियों की विशेष परीक्षा कराने के आदेश दिए थे। इस आदेश को ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। मामले पर 10 अप्रैल को सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने शासन व आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। 16 मई को इस मामले की सुनवाई हुई। आयोग की ओर से कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता गौरव अग्रवाल, रामेश्वर सिंह ठाकुर व समृद्धि जैन ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि यह जानते हुए कि संपूर्ण भर्ती प्रक्रिया याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन है, आयोग प्रक्रिया को निरंतर जारी रखे है। इसका प्रभाव भविष्य में अभ्यर्थियों को भुगतना पड़ेगा। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को स्पष्ट रूप से कहा कि यदि याचिका स्वीकृत होती है और तृतीय पक्ष हित उत्पन्न होता है तो उसके लिए आयोग जिम्मेदार होगा।

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