ब्रेकिंग
मुरैना में 'जहर' पर मेहरबानी: क्या मिलावटखोरों के 'कवच' बन गए हैं अधिकारी गुप्ता? मुरैना पुलिस की 'सेलेक्टिव होली': सच दिखाने वालों से दूरी, वाह-वाही करने वालों पर 'रंग' की बौछार! यूजीसी और आरक्षण को लेकर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक इंदौर में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी घोषित मंडला पुलिस की त्वरित कार्रवाई डकैती के पांच आरोपी जबलपुर से गिरफ्तार, रकम एवं उपयोग की गई कार बरामद भिंड के गोहद चौराहा थाना क्षेत्र के बिरखडी गांव के पास तेज़ रफ़्तार ट्रक ने ट्रेक्टर ट्रॉली में मारी... असम में राजधानी एक्सप्रेस से टकराकर 7 हाथियों की मौतः एक घायल; ट्रेन के 5 डिब्बे-इंजन पटरी से उतरे भिंड में रेत माफियाओं पर कार्रवाई के समय रेत माफियाओं ने एसडीएम की गाड़ी को मारी टक्कर बाल-बाल बचे। अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर पोस्ट मेन ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला की समाप्त ग्वालियर पुलिस लाइन के क्वार्टर में प्रधान आरक्षक ने की आत्महत्या, मचा हड़कंप
व्यापार

दो साल के निचले स्तर पर पहुंची स्टार्टअप की फंडिंग

वैश्विक अर्थव्यवस्था में धीमापन के कारण भारतीय स्टार्टअप कंपनियों को मदद नहीं मिल रही है। इस साल की तीसरी तिमाही में इन कंपनियों ने 205 सौदों से केवल 2.7 अरब डॉलर जुटाई है जो दो साल का निचला स्तर है। पीडब्ल्यूसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई से सितंबर के दौरान केवल दो ही स्टार्टअप यूनिकॉर्न बन पाए हैं। यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि कितने लंबे समय तक यह मंदी का दौर चलेगा। लेकिन यह सीधे दिख रहा है कि निवेशक और संस्थापक दोनों सावधानी बरत रहे हैं। हर सौदे की औसत फंडिंग 4.5 करोड़ डॉलर रही है।वैश्विक स्तर पर जुलाई-सितंबर तिमाही में 20 यूनिकॉर्न बने हैं। इसमें से 45 फीसदी सास सेगमेंट के हैं। जबकि कोई भी कंपनी डेकाकॉर्न नहीं बन पाई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि निवेश के सभी चरणों में गिरावट देखी गई है जिसमें शुरुआती, विकास और देर से सभी शामिल हैं। सामान्य तौर पर शुरुआती चरण के स्टार्टअप अधिक आसानी से पूंजी जुटाने में सक्षम होंगे क्योंकि वे आम तौर पर सार्वजनिक बाजारों में उतार-चढ़ाव से देर से होने वाले सौदों से प्रभावित नहीं होते हैं।

Related Articles

Back to top button